मथुरा पुलिस के खिलाफ आईजी को दी गई तहरीर
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के चर्चित रामू मुठभेड़ कांड में पुलिस फंस गई है। उसके परिवारीजनों ने मंगलवार को आईजी सुजीत पांडे को मथुरा पुलिस के खिलाफ तहरीर दी। इसमें सिपाही वीरेंद्र और जवाहर समेत अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों पर रामू की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दिए जाने का आरोप है। आईजी ने मामले की जांच के आदेश मथुरा एसएसपी को दिए हैं।
फतेहपुर सीकरी निवासी रामू की मौत आठ दिसंबर को मथुरा के राधिका विहार में हुई थी। उसके सिर में गोली लगी थी। पुलिस ने बताया था कि उसने व्यापारी झम्मनदास के साथ लूट की कोशिश की थी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया। हालांकि जब बाद में यह पता चला कि उसके खिलाफ पहले से कोई केस दर्ज नहीं और उसने इसी साल आईटीआई किया है तो पुलिस अफसरों के बोल बदल गए। उन्होंने कहा कि पब्लिक और पुलिस में से गोली किसने चलाई, यह पता नहीं चला है।
उधर, रामू के परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या की। इसी की तहरीर उन्होंने आईजी को दी। उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि राजपाल यादव भी मौजूद रहे।
तो रामू चौहान के धोखे में मारा गया रामू लोधी
आगरा। रामू के परिवारीजनों को शक है कि उसका एनकाउंटर हिस्ट्रीशीटर अपराधी रामू चौहान के धोखे में किया गया है। रामू चौहान की आगरा, मथुरा, मैनपुरी में तलाश चल रही है। वह मैनपुरी का रहने वाला है। मथुरा में भी सक्रिय रहा है। पुलिस को शायद यह सूचना मिली होगी कि राधिका विहार में रामू चौहान आया हुआ है। इसी धोखे में रामू लोधी को गोली मार दी गई।
केस दर्ज न करा पाए सपा नेता
आगरा। सपा नेता सोमवार को फतेहपुर सीकरी में रामू के घर पहुंचे थे। उसके परिवार को आश्वासन दिया था कि इस मामले में मंगलवार को मथुरा पुलिस के खिलाफ केस दर्ज करा दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी सिर्फ जांच के आदेश दिए गए हैं। रामू के परिवार ने एफआईआर के लिए ही आईजी को तहरीर दी थी।