इस पर डीजीपी एके जैन ने एसआईटी का गठन कर डीआईजी लक्ष्मी सिंह को इसका
इंचार्ज बनाया लेकिन अगले ही दिन बृहस्पतिवार को वे छुट्टी चली गई।
हालांकि इसकी वजह उनका अस्वस्थ होना बताया गया लेकिन उनकी गैर हाजिरी में
तीन दिनों में जांच रूकी रहने से सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस सूत्रों का
कहना है कि इन तीन दिनों में एसआईटी ने केस दर्ज कराने वाले लोगों के बयान
तक नहीं लिए हैं।
शैलेंद्र पर 28 केस दर्ज हो चुके है। पुलिस सूत्रों का
कहना है की डीआईजी सोमवार को लौटेंगी, तभी केस की दिशा तय होगी। उधर,
पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि शैलेंद्र के रिश्तेदार कई लोगों पर केस
वापसी का दबाव बना रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने पर एसआईटी में शामिल एक
अधिकारी का कहना था कि वह कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं है।
सवाल - 1
--। केस दर्ज कराने पर 28 लोगों के बयान क्यों दर्ज नहीं हुए ?
सवाल - 2
--। शैलेंद्र को दोबारा रिमांड पर लेने के लिए अभी तक कोर्ट में अर्जी क्यों नहीं दी?
सवाल - 3
--। संदेह के घेरे में आए लोगों से अभी तक पूछताछ क्यों नहीं की गई ?
सवाल - 4
--। शैलेंद्र के साथ जालसाजी केस में नामजद अन्य आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सवाल - 5
--। अफसरों के खिलाफ मिले साक्ष्य कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखे गए?