विजिलेंस की पिछले डेढ़ साल की कार्रवाई देखी जाए तो जाल में फंसने वाले अधिकारियों में 80 फीसदी शिक्षा विभाग के हैं। इसकी वजह यह है कि विभाग के अफसर एक दूसरे की पोल खोलने में लगे हैं। फतेहाबाद ब्लॉक में तो एक के बाद एक तीन मामले हो चुके हैं। 50 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ी गईं पूनम चौधरी वर्ष 2012 में किताबों के हेरफेर के आरोप में निलंबित की गईं थी।
अब उन्हें सहायक अध्यापिका रानी सिंह परिहार की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया है। रानी सिंह लेखिका मंच की अध्यक्ष हैं। उनके पति मनोज परिहार शमसाबाद ब्लॉक में ही एबीआरसी हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मनोज और पूनम में बनती नही है।
इससे पहले अप्रैल 2016 में ब्लॉक संसाधन केंद्र फतेहाबाद पर तैनात एबीआरसी उत्तम सिंह को विजिलेंस टीम ने पकड़ा था। वह शिक्षक से दिव्यांग भत्ता के नाम पर रिश्वत मांग रहा था। इसकी शिकायत शिक्षक भूप सिंह ने विजिलेंस से की थी।
दिसंबर 2016 में एक शिक्षक से एरियर भत्ता लगवाने के नाम पर एबीआरसी भूप सिंह ने 50,000 की रिश्वत मांगी थी। तब उसे विजिलेंस टीम ने पकड़ा था। हालांकि रंगे हाथों पकडे़ जाने के बावजूद एबीआरसी उत्तम सिंह को दोबारा बहुत जल्द उसी पद पर बहाली मिल गई।
मैनपुरी में भी विवादित रहीं पूनम चौधरी
मैनपुरी। आगरा में रिश्वत लेते पकड़ी गईं एबीएसए मैनपुरी के घिरोर ब्लाक में तैनात रही हैं। वहां भी वह काफी विवादित रही हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो उनकी कई शिक्षकों ने शिकायत भी की थी। हालांकि उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 2015 में उनका आगरा स्थानांतरण हो गया था।
पूनम ने लगाया लूट का आरोप
शमसाबाद। पूनम चौधरी ने एसडीएम फतेहाबाद को प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें रानी परिहार और उनके पति मनोज पर लूट और पिटाई का आरोप लगाया है। पूनम ने एसडीएम से कहा है कि इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।