वीडी अग्रवाल समेत आठ आरोपी 14 साल तक पुलिस की पकड़ में आने से बचते रहे, लेकिन हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद 15 दिन में ही आठों जेल भेज दिए गए। इनमें से पांच को गिरफ्तार किया गया। तीन ने सरेंडर कर दिया।
पुलिस की आंखों से उस समय नींद उड़ गई थी जब 21 जनवरी को जारी हाईकोर्ट का आदेश सिकंदरा थाना पहुंचा। इसमें साफ साफ लिखा था कि अगर 15 फरवरी तक आठों आरोपी सीजेएम कोर्ट में पेश नहीं किए गए तो 16 को डीजीपी और आगरा एसएसपी कोर्ट के सामने पेश हों। इस पर पुलिस को हरकत में आना पड़ा। 28 जनवरी को आरोपी बहादुर, कोमल वर्मा, सियाराम और विनोद को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती बिल्डर वीडी अग्रवाल को पकड़ने की थी। वीडी अग्रवाल पर हाथ डालना आसान नहीं था। पुलिस सूत्रों की मानें तो उन्हें पुलिस ने ही सरेंडर करने की सलाह दी थी। इस बीच शेरा पहलवान को पुलिस ने गिरफ्तार किया। प्रताप और सुरेंद्र ने सरेंडर किया। अब केवल बिल्डर ही जेल जाने से बचे थे। वे शुक्रवार को पहुंच गए।
हाईप्रोफाइल मुल्जिम को मिला वीआईपी ट्रीटमेंट
हत्या के मुल्जिम वीडी अग्रवाल को कोर्ट में सरेंडर के बाद पुलिस से पूरा वीआईपी ट्रीटमेंट मिला। उन्हें दीवानी हवालात में एक मिनट के लिए भी आम कैदियों के बीच नहीं रखा गया। बिल्डर ने जैसे ही सरेंडर किया, वैसे ही एक सिपाही कोर्ट के बाहर बाइक लेकर पहुंच गया। उन्हें बाइक से ही जेल तक ले जाया गया। जेल में भी एंट्री एक मिनट के भीतर मिल गई। जेल के स्टाफ ने कोई सवाल जवाब नहीं किया। सबसे हैरानी की बात तो यह रही कि पुलिस ने बिल्डर का बयान दर्ज करने में भी कोई देरी नहीं की। तुरंत ही दरोगा जेल में सवाल जवाब करने पहुंच गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो उनसे पहले ही सिपाही कोर्ट के बाहर पहुंच गए थे। पुलिस को मालूम था कि बिल्डर को आज ही (शुक्रवार को) कोर्ट में सरेंडर करना है। फिर भी गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास ही नहीं किया गया। हालांकि इंस्पेक्टर सिकंदरा थाना का कहना है कि वीडी अग्रवाल के सरेंडर की सूचना के बाद पुलिस कोर्ट पहुंची। उनकी तलाश की जा रही थी। इसी के दबाव में उन्होंने सरेंडर किया है।
तबीयत बिगड़ने की अफवाह उड़ी
देर शाम यह अफवाह भी उड़ी कि वीडी अग्रवाल की जेल में तबीयत खराब हो गई। उन्हें जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि जेलर का कहना है कि यह गलत सूचना है। उन्होंने डाक्टर से जानकारी की है। वे अस्पताल में नहीं, बैरक में हैं।
वीडी को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
-। 11 जून 2002 को सिकंदरा में प्लाट के विवाद में हुई फायरिंग में आलमगीर उर्फ छोटे खां की जान चली गई।
-। पुलिस की ओर से दर्ज इसकी एफआईआर में 13 लोग नामजद किए गए।
-। पांच आरोपियों को तभी पकड़ लिया, आठ फरार चलते रहे।
-। पहले जांच पुलिस ने की बाद में सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी गई।
-। छह जनवरी 2006 को सभी 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
-। आठों आरोपी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन कहीं राहत नहीं मिली।
-। 21 जनवरी को हाईकोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सख्त आदेश जारी कर दिया।
20 राउंड गोलियां चली थीं
आगरा। एफआईआर के मुताबिक ,सिकंदरा में प्लाट पर कब्जा करने के लिए दो पक्ष एक साथ पहुंच गए थे। दोनों ने प्लाट पर अपना-अपना दावा किया था। इसी विवाद में गोलियां चलाई गई थीं। कुल 20 राउंड फायर किए गए थे। एक गोली आलमगीर उर्फ छोटे खां को लग गई थी। उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी।
खुद को बेकुसूर बताते रहे वीडी
आगरा। वीडी अग्रवाल का बयान पहले पुलिस ने दर्ज किया और फिर सीबीसीआईडी ने। उन्होंने दोनों में यही कहा कि उन्हें तो घटना का पता भी बाद में चला। वे उस जगह मौजूद ही नहीं थे जहां गोलियां चलाई गईं। वे उस समय अपने दफ्तर में थे। उन्होंने प्लाट खरीदा जरूर था।