शहर के प्रमुख स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद पुलिस अफसरों और स्कूल संचालकों ने सिक्योरिटी सिस्टम फुल प्रूफ बनाने के दावे तो किए, लेकिन महीने भर में पुलिस को सुरक्षा उपाय देखने तक की फुर्सत नहीं मिली। सभी स्कूलों की सिक्योरिटी ग्रेडिंग कराने का प्लान भी बातों से आगे नहीं बढ़ा। पांच-छह स्कूलों को छोड़ दें तो कहीं भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बच्चों की ड्रिल (अभ्यास )नहीं कराई गई। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है, यदि हादसा हुआ तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?
आठ और नौ फरवरी को शहर के पांच स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के खत मिले थे। धमकी देश के मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के नाम से थी। सात दिन तक शहर में सनसनी रही थी। पुलिस, प्रशासन, स्कूल संचालक, अभिभावक सभी टेंशन में आ गए थे। पुलिस अफसरों ने सभी स्कूल संचालकों की मीटिंग बुलाई थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह हुआ कि सभी स्कूलों को पुलिस की ओर से फार्म मुहैया कराए जाएंगे। इन्हें भरकर बताना होगा कि स्कूल में सीसीटीवी कैमरे, अलार्मिंग सिस्टम, सिक्योरिटी गार्ड,
वॉचमैन जैसे क्या-क्या बंदोबस्त हैं?
इन्हीं के आधार पर पुलिस को स्कूलों की ग्रेडिंग करनी थी। इसके लिए पुलिस को स्कूलों का मुआयना भी करना था। लेकिन अभी तक एक भी स्कूल को फार्म नहीं दिया गया। हालांकि पुलिस अफसर इसका ठीकरा स्कूल संचालकों पर फोड़ रहे हैं। स्कूल संचालकों का कहना है कि पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि बच्चों की सुरक्षा के उपाय करने में यह सीधी लापरवाही है।
स्कूलों में ये करने थे उपाय
- सीसीटीवी कैमरे लगाने थे।
- सिक्योरिटी गार्ड रखने थे।
- मॉक ड्रिल करानी थी।
- आस-पास गश्त बढ़ानी थी।
- अभिभावकों को आईडी कार्ड।
नहीं खुला धमकी का राज
स्कूलों में हाफिज सईद के नाम से मिले धमकी भरे खतों का राज नहीं खुल पाया है। दो दिन में दो स्कूलों में खत मिले थे। इनकी जांच खुफिया पुलिस को सौंपी गई थी।
सिक्योरिटी के आधार पर ग्रेडिंग के लिए पुलिस ने कई स्कूल संचालकों से संपर्क किया। लेकिन उनका रिस्पांस पॉजिटिव नहीं रहा। अपने स्तर से सुरक्षा संबंधी कदम उठाए हैं। - सुशील घुले (एसपी सिटी)
ज्यादातर स्कूलों ने कैमरे लगा लिए हैं, कमी पुलिस की ओर से रही है, जो मुआयना तक नहीं किया।
- सुशील गुप्ता ( सचिव, अप्सा )
परिषदीय स्कूलों में सीसीटीवी तो दूर चौकीदार तक नहीं है। सरकार को उपाय करने चाहिए।
- राजेंद्र राठौर ( जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ)
माध्यमिक विद्यालयों में सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। वजह इसके लिए बजट का न होना है।
- डा. भोजकुमार शर्मा ( जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ)