हत्या के मामले में नौ साल से फरार चल रहे पुष्पांजलि कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रबंध निदेशक वीडी अग्रवाल की तलाश में पुलिस ने एक बार भी बड़ी ढिलाई बरती। इस बार गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया था। इसके बावजूद पुलिस का रवैया पहले जैसा ही रहा। इस केस में फरार चल रहे अन्य चार आरोपी तो पकड़ लिए गए, लेकिन अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए ठीक से दबिश तक नहीं दी गई।
हत्या का यह केस 11 जून 2002 का है। सिकंदरा-बोदला रोड पर एक हास्टिपल के सामने प्लॉट के विवाद में वीडी अग्रवाल और प्रमोद कुमार पक्षों में आमने-सामने फायरिंग हुई थी। 20 राउंड गोलियां चली थीं। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस ने अपनी ओर से हत्या, बलवा, जानलेवा हमला की धाराओं में केस दर्ज किया था।
इनमें से सुनील, लक्ष्मण, नानक, प्रमोद, प्रशांत तिवारी, सजेश, नफीस, राजेंद्र कोर्ट में पेश हो गए थे। आठ आरोपी फरार चल रहे थे। इसके बाद जांच सीबीसीआईडी को ट्रांसफर हो गई थी। लंबी जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ छह जून 2006 को कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई।
इसके बावजूद फरार आरोपी नहीं पकड़े गए। वीडी अग्रवाल के गैर जमानती वारंट भी तभी जारी किए गए थे। पुलिस उन्हें तब से नहीं पकड़ पाई है। हाल ही में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए फरार मुल्जिमों की गिरफ्तारी का आदेश सिकंदरा थाना पुलिस को दिया था। इंस्पेक्टर सिकंदरा का कहना है कि वीडी अग्रवाल समेत सभी फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। अन्य चार आरोपी पकड़ लिए गए हैं।
जेल भेजे गए चारों आरोपी
आगरा। पुलिस ने फरार आरोपियों में से बहादुर सिंह, कोमल शर्मा, सियाराम और विनोद को गिरफ्तार कर एसीजेएम प्रथम चंद्रमणि मिश्रा की कोर्ट में पेश किया। उनकी जमानत के लिए अधिवक्ता दुर्गविजय सिंह, ओमवीर सिंह और आरके राघव ने याचिका दी। इसे खारिज कर दिया गया। चारों आरोपी जेल भेज दिए गए।
चार को पकड़ने की चुनौती
आगरा। फरार आरोपियों में प्रभु नगर ,जयपुर हाउस निवासी वीडी अग्रवाल के अलावा राजीव नगर सिकंदरा के शेरा पहलवान, मथुरा के सुरेंद्र सिंह और कन्नौज का नानक सिंह शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के बगैर इन पर आरोप तय हो पाना मुमकिन नहीं है।