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केंद्रीय राज्यमंत्री के दबाव में पुलिस ने तोड़ा कानून

Wed, 17 Jun 2015 02:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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बता दें, रविंद्र कठेरिया के सेक्टर तीन स्थित घर में घुसकर 25 मई को कुछ लोगों ने उनके बेटे राहुल के पैर में गोली मार दी थी। मामले में पुलिस ने सिरसागंज के विद्याराम और उनके बेटे सोनू को शुक्रवार से हिरासत में ले रखा है। विद्याराम की पत्नी मालती देवी का आरोप है कि पुलिस ने मंत्री के दबाव में उनके बेटे राजेश उर्फ मोनू को भी नामजद किया है। मोनू गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना वाली रात को वह अस्पताल में भर्ती था। इसकी जानकारी थाना जगदीशपुरा पुलिस को दी जा चुकी है, लेकिन पुलिस कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है।

दबाव बनाने को पकड़ा
हमले के मामले में एक आरोपी को जेल भेजा गया है। अभी दो फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। दबाव बनाने को किसी को हिरासत में लिया है तो छोड़ दिया गया होगा।
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राजेश कुमार सिंह, एसपी सिटी

क्या था मामला
25 मई को हुए हमले के मामले में सिरसागंज के स्वतंत्र कुमार, संतोष कुमार, राजेश समेत अन्य चार-पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं होने पर मंत्री ने एसएसपी से नाराजगी जताई थी। इसके बाद ही जिले की खराब कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर भाजपा का आंदोलन शुरू हुआ, जोकि जारी है। मंत्री का दबाव बढ़ा तो पुलिस ने आननफानन में हमलावरों की गिरफ्तारी को दबाव बनाना शुरू कर दिया। रविवार को हमले के आरोपी स्वतंत्र कुमार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
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मकान पर कब्जे की कहानी
सिरसागंज निवासी मालती देवी ने बताया कि सेक्टर तीन में जिस मकान को लेकर रविंद्र कठेरिया से विवाद है, वह मकान उनका था। तकरीबन आठ साल पहले रविंद्र कठेरिया इस मकान में किराए पर रहने आए थे। बाद में मालती देवी ने इसका सौदा उन्हीं से कर दिया। तीन माह में रजिस्ट्री कराने का अनुबंध हुआ था। रविंद्र ने कुछ पैसा एडवांस दे दिया लेकिन इसके बाद पांच साल तक बैनामा नहीं कराया। बाद में उन्होंने मकान का बैनामा सिरसागंज के संतोष कुमार को कर दिया था। इसके बाद भी रविंद्र ने मकान खाली नहीं किया। एक साल पहले एसडीएम सदर ने जांच के बाद मकान को कब्जा मुक्त कराने के आदेश पुलिस को दिए थे। तभी से मकान पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है।
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