एसएसपी राजेश डी मोदक ने बताया कि आगरा के
रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह के बैंक खाते से पिछले साल 20 हजार रुपये की रकम
आनलाइन ट्रांजेक्शन करके निकाल ली गई थी। फोन पर एटीएम कार्ड से संबंधित
जानकारी लेकर वारदात को अंजाम दिया गया था। थाना नाई की मंडी में पांच
अगस्त 2014 को मुकदमा दर्ज कराया। साइबर क्राइम सेल के साथ एक टीम का गठन
किया। टीम ने रविवार को गुड़गांव के डीएलएफ सिटी से तीन साइबर अपराधियों को
गिरफ्तार किया गया। इनमें मंगोलपुरी (नई दिल्ली) निवासी राकेश कुमार,
जौहरीपुर एन्क्लेव (नई दिल्ली) संतोष मौर्या और धुरी रोड नियर गौशाला
इन्नी स्टेट जिला संगरूर (पंजाब) निवासी रमेश सिंह हैं।
पुलिस टीम में
प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली अरुण कुमार, साइबर सेल प्रभारी नितिन कसाना
शामिल रहे। पुलिस ने बताया कि राकेश गैंग का सरगना है। वह अब तक तकरीबन
सौ से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाकर लाखों की ठगी करता है। राकेश
लोगों के खाते से रकम ट्रांसफर करने के बाद आनलाइन सट्टा और कसीनोे खेलने
में लगाता था। कुछ पैसा आनलाइन शॉपिंग में भी लगाते थे। एक सिम कार्ड का
इस्तेमाल 15 दिन तक करता था।
सरगना राकेश 12वीं कक्षा तक पढ़ा है। इसके
अलावा संतोष आठवीं और रमेश चौथी कक्षा तक पढ़ा है। राकेश ने बताया कि वह
इंटरनेट पर लोगों के खाते से रकम उड़ाने की जानकारी लेता था। वह लोगों से
एटीएम कार्ड का 16 डिजिट का नंबर पूछता है। इसके बाद कार्ड के पीछे लिखा
तीन डिजिट वाला सीवीवी नंबर भी पता करते हैं। हर बार लोगों को बैंक अधिकारी
बताते हैं। नंबर नहीं बताने पर कार्ड ब्लाक करने का भय दिखाकर जानकारी
हासिल कर लेते हैं। इसके बाद नेट बैकिंग के जरिये आन लाइन ट्रान्जेेक्शन
करते हैं।
मोबाइल कंपनी की लापरवाही
राकेश के पास से मोबाइल कंपनी
के 40 सिम बरामद हुए है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही आदमी को इतनी सिम
कैसे जारी कर दिए गए। इनकी जांच क्यों नहीं की गई।