दिल्ली से ऑनलाइन ठगी करने वाला गैंग फर्जी आईडी पर लिए गए चालू सिम कार्ड को 400 रुपये में खरीदता था। 75 रुपये में एक क्रेडिट और डेबिट कार्ड धारक का डेटा लेते थे। इसके बाद बैंक अधिकारी बनकर कॉल करके लोगों को जानकारी बताते थे।
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साइबर क्राइम सेल के प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि हाल ही में सदर क्षेत्र के एक सैन्य कर्मी को कॉल करके इसी तरह 20 हजार निकाल लिए गए थे। इस मामले में साइबर सेल ने जांच की। इसके बाद आगरा के थाना सदर में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने जांच की तो दिल्ली का गैंग पकड़ा गया। गैंग का सरगना रोहित है। वो ग्रेजुएट है। दो साल पहले एक कॉल सेंटर में काम करता था। इसमें लोगों को कॉल करके चूना लगाया जाता था। बाद में रोहित ने घरवालों के कहने पर नौकरी छोड़ दी।
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बेरोजगार होने पर रोहित खुद इस काम में लग गया। सिम और डेटा बिचौलियों से लेकर आता है। बिचौलिए क्रेडिट और डेबिट कार्ड कंपनी और कॉल सेंटर से चोरी करते हैं। उनके पास पैन कार्ड और शॉपिंग साइट का भी डेटा होता है।
गिरफ्तार अभियुक्त और उनका काम
- रोहित निवासी तिलक नगर, दिल्ली: बैंक अधिकारी बनकर लोगों से बात करता था। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड-डेबिट कार्ड ग्राहक का डाटा और मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराना।
- रवि निवासी तिलक नगर, दिल्ली: बैंक के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट का कर्मचारी बताकर क्रेडिट कार्ड धारकों को फोन करता था।
- राज प्रवीण सिंह निवासी नरेला, दिल्ली: गैंग लोगों के खातों से रकम ट्रांसफर करने के लिए किराये पर बैंक खाते लेता था। यह राज ही उपलब्ध कराता था।
- विक्की निवासी नरेला, दिल्ली: क्रेडिट कार्ड का ओटीपी प्राप्त होने पर रकम ई वालेट में भेजकर बैंक खातों में ट्रांसफर करता था। एटीएम से रकम भी निकालता था।
- शुभम निवासी नरेला, दिल्ली : किराये पर गैंग को बैंक खाते उपलब्ध कराता था। खुद का भी खाता लोगों की रकम निकालने में इस्तेमाल करता था।
ऐसे फंसाता था जाल में
सरगना रोहित बैंक अधिकारी बनकर कॉल करता था। वो लोगों से कहता था कि आपने नया कार्ड लिया है। इसमें शॉपिंग करने पर रिवार्ड प्वाइंट, कैश बैक और लकी ड्रा निकल रहा है। जब लोगों को वो कार्ड और अन्य जानकारी बताता है तो विश्वास हो जाता है। इस झांसे में आकर लोग बैंक खाते से संबंधित जानकारी और ओटीपी बता देते हैं।
इस गैंग के पास से बरामद डेटा उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली के क्रेडिट कार्ड धारकों का है। यह 30 हजार से अधिक लोगों का है। डेटा में धारक का नाम, पता, मोबाइल नंबर की जानकारी होती थी।
गैंग के अन्य सदस्य ई-वॉलेट में रकम ट्रांसफर करके खाते से निकाल लेते हैं। गैंग हर दिन 20-25 लोगों कॉल करता है। अगर, कोई फंस जाता है तो 20 हजार से एक लाख रुपये तक खाते से निकाल लेते हैं। उनकी दिन भर की कमाई एक से डेढ़ लाख रुपये होती थी।
कई दिन कॉल पर लोग समझ भी जाते थे। इस कारण कमाई नहीं हो पाती है। सभी आपस में रकम बांट लेते हैं। रवि हाल ही में गैंग में शामिल हुआ। वो भी कॉल करता था। प्रवीन 12वीं पास है। उसके पिता एक सरकारी सिक्योरिटी सर्विस में हैं।
विक्की 12वीं पास है। वो कंप्यूटर और लैपटॉप का जानकार है। गैंग लोगों के पास फर्जी वेब लिंक भी भेजता है। जब लोग लिंक पर क्लिक करते हैं तो उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। विक्की फर्जी ई वालेट बनाता था। पुलिस यह पता करने में लगी है कि सिम और डेटा कौन देता है।
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