यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी के पास हथियार तो होेंगे, लेकिन चलाने के लिए गोलियां नहीं। यात्री सुरक्षा पर यह बड़ा सवाल खुद जीआरपी आगरा अनुभाग ने उठाया है। छोटे हथियार मुहैया कराने के हाईकोर्ट के निर्देश पर डीजीपी कार्यालय के जवाब ने सभी का आश्चर्य में डाल दिया है। एसपी जीआरपी को भेजे पत्र में लिखा है कि शासन, आगरा अनुभाग को पिस्टल और रिवाल्वर तो दे देगा, लेकिन कारतूस नहीं।
जीआरपी के जवान आज भी द्वितीय विश्व युद्ध में उपयोग की गई ‘थ्री नॉट थ्री’ रायफल से ही यात्रियों की सुरक्षा कर रहे हैं। जबकि सिविल पुलिस के पास वर्तमान में एमपी-5 आ चुकी है। थ्री नॉट थ्री इतनी पुरानी हो चुकी है कि यह मौके पर धोखा दे जाती है। कभी कारतूस फंस जाता है, तो कभी लीवर नहीं खिंचता। इसका फायदा बदमाशों को मिलता है। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। इस पर कोर्ट ने जीआरपी मुख्यालय को निर्देश दिए थे कि आगरा अनुभाग को हल्के और छोटे असलाह दिए जाएं। विगत दिनों मुख्यालय की ओर से एसपी जीआरपी को पत्र आया। इसमें लिखा कि शासन, आगरा अनुभाग को 900 पिस्टल और रिवाल्वर देगा, लेकिन कारतूस नहीं दे सकेंगे। इस पर जीआरपी की ओर से एक पत्र शासन को भेजा गया है। पूछा है कि बिना कारतूस के पिस्टल और रिवाल्वर का क्या फायदा? बिना कारतूस के यात्रियों की सुरक्षा कैसे करेंगे।
सुरक्षा के लिए मांगे थे हल्के हथियार
जीआरपी आगरा अनुभाग में करीब 2200 जवान हैं। 12 थाने और 24 पुलिस चौकी हैं। आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, मैनपुरी, एटा, इटावा, फीरोजाबाद आदि क्षेत्र आगरा अनुभाग में आते हैं। जीआरपी ने प्रथम चरण में शासन से 9 एमएम की पिस्टल व 32 प्वाइंट की 900 रिवाल्वर मांगी। ताकि प्रमुख ट्रेनों में हल्के वाहनों से बेहतर सुरक्षा हो सके।
हाल में हुई यात्रियों लूटपाट
विगत दिनों कालका एक्सप्रेस में मथुरा-धौलपुर के बीच में करीब 25 बदमाशों ने आधा दर्जन यात्रियों से लूटपाट की। तीन कोच में दर्जनों यात्रियों को घायल करने के बाद पथराव भी किया। एक सप्ताह में करीब चार ट्रेनों को बदमाश निशाना बना चुके हैं।
बिना कारतूस के असलाह लेने का कोई मतलब नहीं। हमें निर्धारित मानक से कम कारतूस दे दिए जाएं। बिना कारटेज के हम शस्त्र नहीं लेंगे।
- गोपेश नाथ खन्ना, एसपी जीआरपी