पुलिस ने सोमवार सुबह सिकंदरा इलाके से बड़े विदेशी ब्रांड की हुबहु नकली पिस्टल बनाने की दो फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। इनमें से एक में पिस्टल के पार्ट्स बनाए जा रहे थे। दूसरी में इन्हें जोड़कर फाइनल टच दिया जा रहा था। इन पिस्टलों की सप्लाई ऑन डिमांड ऑर्म्स डीलरों को की जा रही थी। अभी तक लगभग 300 पिस्टल बेची भी जा चुकी थीं। फैक्ट्रियों से एक तैयार, 97 अधबनी पिस्टल और 315 कारतूस बरामद किए गए हैं। इस मामले में मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की गई है। इनके पास से 2.60 लाख कैश बरामद किया गया है।
मुख्य आरोपी आवास विकास कालोनी सेक्टर नौ का निवासी लोकेश शर्मा है। वह एमएससी मैथमेटिक्स फर्स्ट डिवीजन है। उसका सेक्टर नौ में ही एक्सक्लूसिव नाम से कोचिंग सेंटर है। उससे पिस्टल खरीदने वाला आर्म्स डीलर है लखनऊ के बजीरगंज की रिवर बैंक कालोनी के पुष्पांजलि एंक्लेव का हरजीत सिंह सरना। उसकी लखनऊ में लाइसेंसी असलहा की तीन दुकानें हैं। सिंह शस्त्रालय, सरल आर्म्स डीलर और अधिकारी गन हाउस। तीसरा आरोपी दिल्ली के तिलकनगर के कृष्णा पार्क का गुरबख्स सिंह है। वह पहले खराद फैक्ट्री में काम करता था। अब लोकेश की फैक्ट्री में पिस्टल तैयार कर रहा था।
लोकेश और उसके पिता मदन लाल शर्मा 20 साल पहले आर्म्स डीलरों के यहां हथियार मरम्मत का काम करते थे। तभी से हथियार बनाना सीख गए थे। लोकेश ने 2012 से पिस्टल बनाकर बेचना शुरू कर दिया। एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि और भी कई गन हाउस पर अवैध पिस्टल बेची गई हैं। उनके बारे में पड़ताल की जा रही है। इस गिरोह में और भी लोग शामिल हैं। उनका पता लगाया जा रहा है। आर्म्स डीलर पिस्टल के कैटलॉग भेजते थे। उन्हें देखकर लोकेश और गुरबख्स हुबहु पिस्टल तैयार कर देते थे। आर्म्स डीलर लोकेश को प्रति पिस्टल 1.5 लाख देते थे। वह इनमें से 20 हजार गुरबख्स को देता था। डीलर पिस्टल को छह से आठ लाख में बेचते थे। फैक्ट्री में पिएट्रो बेरेटा, स्टार, बैवले जैसी कंपनियों की नकली पिस्टल बनाए गए हैं।
आर्म्स डीलरों ने कमाए 16.5 करोड़
पुलिस का कहना है कि अभी तक 300 पिस्टल को डीलर बेच चुके हैं। इन्हें छह से आठ लाख में बेचा गया। इनका औसत सात लाख है। 1.5 लाख लोकेश को देते थे। इस हिसाब से एक पर बचते थे 5.5 लाख। 300 के हो गए 16.5 करोड़।
लोकेश शर्मा के हिस्से आए 3.75 करोड़
लोकेश को प्रति पिस्टल 1.5 लाख रुपये मिलता था। वह इसमें से 20 हजार गुरबख्श को दे देता था। पांच हजार बनाने में खर्च होते थे। इस तरह उसे एक पिस्टल पर 1.25 लाख रुपया बच रहा था। 300 के हो गए 3.9 करोड़ रुपये।
फैक्ट्री- 1 : निखिल पैराडाइज कालोनी ( फोटो )
यह निखिल पैराडाइज कालोनी में प्रदीप की बिल्डिंग में चल रही थी। किराया था छह हजार प्रति माह। दो कमरे तीन कमरे हैं। तीनों में मशीन लगी हैं। यहां पिस्टल के पार्ट्स तैयार किए जाते थे। बिजली कनेक्शन प्रदीप के नाम है। बिल लोकेश चुकाता था।
फैक्ट्री-2 : पश्चिम पुरी
इसमें मशीनें कम लगी हैं। शास्त्रीपुरम में तैयार किए गए पिस्टल पार्ट्स यहां लाए जाते थे। यहां पर इन्हें जोड़ा जाता था। पिस्टल को फाइनल टच दिया जाता था। इन पर स्टार, बैवले, बेरेटा जैसी विदेशी कंपनियों की मुहर और नंबर लिखे जाते थे।
पहली बार हुई फैक्ट्री में पीसी
आगरा। यह पहला मौका था जब शहर में असलाह की ऐसी फैक्ट्री पकड़ी गई जहां विदेशी कंपनियों की डुप्लिकेट पिस्टल इतने बड़ै पैमाने पर बनाई जा रही थीं। यह भी पहली बार हुआ जब अवैध शस्त्र का कारखाना पकड़े जाने पर प्रेस कांफ्रेंस कारखाने में हुई। एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने इस खुलासे की जानकारी शास्त्रीपुरम के निखिल पैराडाइज कालोनी स्थित फैक्ट्री में दी।