संस्था की ओर से अधिवक्ता डाक्टर नूतन ठाकुर ने कहा कि शैलेंद्र
अग्रवाल अपनी ऊंची पहुंच के चलते 14-14 गनर लेकर चलता था। उन्होंने ई-मेल
के माध्यम से पीआईएल की जानकारी दी। उनका कहना है कि शैलेंद्र के साथ पूर्व
डीजीपी एएल बनर्जी और एसी शर्मा ने भारी धन उगाही की।
इस मामले की सीबीआई जांच अनिवार्य है। पीआईएल में इसके अलावा एक न्यायिक आयोग गठित कर इस मामले की जांच कराए जाने की मांग की गई है।
लेकिन तैयारी ईओडब्लू जांच की
आगरा।
इस जालसाजी केस में बड़े अफसरों के नाम सामने आते ही एक ओर सीबीआई जांच की
मांग ने जोर पकड़ा है तो दूसरी तरफ जांच बदले जाने की चर्चाओं ने। पुलिस
सूत्रों का कहना है कि यह मामला पुलिस की इकोनोमिक ओफेंस विंग (ईओडब्लू) को
सौंपा जा सकता है। इसकी तैयारी पहले से चल रही थी लेकिन अब संभावना बढ़ गई
है। ईओडब्लू आर्थिक अपराध की जांच करने वाली जांच एजेंसी है। इसमें जांच
बहुत लंबे समय में पूरी होती है। अगर जांच इस एजेंसी के पास पहुंच गई तो
मुश्किल में फंसे अफसरों को बड़ी राहत मिल सकती है। क्योंकि सीबीआई जांच का
सामना करना दागी अफसरों के लिए बहुत मुश्किल होगा। सीबीआई की टेक्निकल वंग
ने ही शैलेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल निकालने के साथ एसएमएस डिकोड किए।
जिस तरह आला अधिकारियों के कनेक्शन शैलेंद्र के साथ सामने आए हैं, उससे
सरकार के लिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है।