आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान की लैब में शोध छात्रा की हत्या के मामले में दो महीने में गवाही पूरी करनी होगी। इसके लिए कोर्ट ने शनिवार को आदेश पारित कर दिया। वादी का बयान भी पूरा कर लिया गया है। केस में धारा 376ए की वृद्धि की गई है। इससे आरोपी उदयस्वरूप की मुश्किल बढ़ गई है।
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हाईकोर्ट ने पिछले दिनों शोध छात्रा हत्याकांड केस छह महीने में निस्तारित करने के आदेश किए थे। इसी आदेश के अनुपालन में अपर जिला जज वीके जायसवाल ने सभी गवाहों की गवाही दो महीने में पूरी करने के आदेश किए हैं।
शनिवार को वादी मृतका के पिता का बयान हुआ, जोकि कई घंटे तक चला। कोर्ट में उनकी गवाही और जिरह पूरी हो गई। अभियुक्त पक्ष की ओर से लंबी जिरह की गई। अगले गवाह के बयान के लिए 23 जनवरी की तिथि नियत कर दी है। इसके साथ ही आरोपी यशवीर संधु पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा नहीं लगाई गई।
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आरोपी का प्रार्थनापत्र खारिज
उधर, कोर्ट ने आरोपी उदयस्वरूप के प्रार्थनापत्र को भी खारिज कर दिया। इसमें आरोपी पक्ष ने पुलिस और सीबीआई की अलग-अलग चार्जशीट, धाराओं, तथ्यों और यशवीर संधु को क्लीनचिट देने को आधार बनाते हुए खुद को अपराध से मुक्त करने की याचना की थी। इसके साथ ही कोर्ट ने केस में लगी धारा 302, 376 और 201 में संशोधन कर धारा 376ए की वृद्धि की है। इससे आरोपी उदयस्वरूप की मुश्किल बढ़ गई है।
यह है धारा 376ए
वरिष्ठ अधिवक्ता बसंत गुप्ता के मुताबिक, धारा 376 ए के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ दुष्कर्म करता है और उससे उसे चोट आती हैं, जिससे उसकी मृत्यु होती है। दोषी को न्यूनतम 20 वर्ष तक और अधिकतम मृत्यु होने तक कारावास में रहने की सजा का प्रावधान है। यह प्रावधान वर्ष 2013 में संशोधन करके किया गया है।
15 मार्च, 2013 को हुई थी हत्या
मूलरूप से दिल्ली निवासी शोध छात्रा को 15 मार्च, 2013 को दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीइआई) की लैब में कटर से मारा गया था। पुलिस ने संस्थान के प्रमुख अधिकारी के रिश्तेदार उदयस्वरूप और लैब असिस्टेंट यशवीर सिंह संधू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पुलिस की जांच में पाया गया था कि उदयस्वरूप ने दुष्कर्म में नाकाम होने पर नेहा की हत्या की थी। इस मामले के खुलासे के लिए छात्र-छात्राओं ने आंदोलन चलाया था। जुलाई, 2013 में जांच सीबीआई को दे दी गई थी।
सीबीआई ने पांच जनवरी, 2016 को उदयस्वरूप के खिलाफ हत्या (धारा 302), दुष्कर्म (धारा 376) और साक्ष्य मिटाने (धारा 201) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी यशवीर सिंह संधू की भूमिका नहीं पाई थी।
मामले में 36 गवाह बनाए गए। सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट का था। रेप की आशंका के चलते बनाई गई स्लाइड से डीएनए सैंपल लिया गया था। इसका मिलान उदयस्वरूप के डीएनए से कराया गया था।
- 15 मार्च 2013 को शोध छात्रा का दयालबाग शिक्षण संस्थान की लैब में कत्ल।
- 16 मार्च 2013 को छात्र-छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
- 17 मार्च 2013 को लैब के पास से लैपटॉप मिला। पुलिस ने जांच को भेजा।
- 18 मार्च 2013 को संस्थान परिसर में मिला मोबाइल। पुलिस ने मोबाइल की जांच की।
- 22 अप्रैल 2013 को शोध छात्रा के आरोपियों को हिरासत में लिया।
- 23 अप्रैल 2013 को शोध छात्रा के आरोपी गिरफ्तार किए गए।
- 16 जुलाई 2013 को चार्जशीट सीओ कार्यालय भेजी गई।
- 18 जुलाई 2013 को कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
- 22 जुलाई 2013 को केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया।
- 10 फरवरी 2014 को दोनों आरोपी जमानत पर हुए रिहा।
- पांच जनवरी 2016 को सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट लगाई।
- 12 मई 2016 को उदयस्वरूप दुष्कर्म के आरोप में भेजा जेल।
दोनों आरोपियों के परिजन आए
वादी पक्ष की ओर से स्वतंत्र अभियोजक अशोक कुमार गुप्ता, एसएस चौहान और एडीजीसी मधु शर्मा ने जिरह की। वहीं अभियुक्त पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह, सुनील माथुर, सुब्रत मेहरा ने जिरह की। दोनों अभियुक्तों के परिजन भी कोर्ट परिसर में मौजूद रहे।