आगरा पुलिस ने मनोज की शनाख्त उसकी जेब से मिले सेना के आईकार्ड से की। उसके परिवार से संपर्क भी हो गया। लेकिन विष्णु की पहचान पुख्ता तौर पर नहीं हो पाई है। उसकी जेब में मिली डायरी के एक पेज पर नाम और पता लिखा मिला। इसी आधार पर उसे विष्णु माना गया, लेकिन उसके परिवार से संपर्क नहीं हो पाया। पुलिस गुड़गांव में उस पते पर पहुंची, तो वहां उसका परिवार नहीं मिला।
आगरा पुलिस ने दोनों के फोटो हरियाणा पुलिस को व्हाट्स एप से भेजे गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विष्णु का चेहरा देखकर हरियाणा के गुड़गांव की पुलिस चौंक गई। पुलिस रिकार्ड में इस चेहरे वाला शख्स, विष्णु नहीं, कोई और है। उसकी छवि आपराधिक बताई जाती है। उसकी एक गिरोह से गैंगवार भी चल रही है। पुलिस ने इसी दिशा में जांच शुरू कर दी है।
पुलिस यह भी मालूम कर रही है कि कहीं एक जैसी शक्ल के दो शख्स तो नहीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि गुड़गांव पुलिस को विष्णु की जेब से मिली आईडी फर्जी होने का शक है। उधर, आगरा पुलिस की एक टीम गुड़गांव भेजी गई है। उधर, मनोज के परिवार का भी यही कहना है कि वे विष्णु को नहीं जानते हैं। उन्हें यह भी नहीं मालूम है कि मनोज उसके साथ क्यों आया?
हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग या गैंगवार
फिलहाल दो ही बिंदुओं पर चल रही है पुलिस की जांच
फतेहपुर सीकरी। पुलिस को मौके पर दोनों मृतकों के मोबाइल फोन भी मिले। इनकी कॉल डिटेल निकलवाई गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि विष्णु की फोन पर युवतियों से लंबी बात होती थी। शुक्रवार सुबह भी चार बजे उसने काफी देर एक युवती से बात की। इसके चलते माना जा रहा है कि दोहरे हत्याकांड के पीछे प्रेम प्रसंग हो सकता है। हालांकि सही जानकारी कातिलों के पकड़े जाने पर ही आएगी। उधर, उसके चेहरे को देखकर गुड़गांव पुलिस को गैंगवार में हत्या का भी शक है। पुलिस हाईवे के टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देख रही है। उम्मीद है कि मौके पर मिली कार नजर आई तो इसके पीछे कातिलों की कार भी हो सकती है। दरअसल, इस चेहरे वाला शख्स आपराधिक छवि का है। उसकी गैंगवार भी चल रही है। हालांकि इस बारे में भी कोई पुख्ता जानकारी गुड़गांव पुलिस के पास नहीं है। सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि विष्णु बताए गए शख्स की सही पहचान की जाए।
पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। हरियाणा पुलिस की मदद भी ली जा रही है। जल्द ही कोई नतीजा सामने आ सकता है - डा. प्रीतिंदर सिंह ( एसएसपी )
रेलवे ट्रैक की ओर भागे
घटना स्थल पर स्विफ्ट वीडीआई कार (नंबर एचआर 34 एच 7507) खाली खड़ी थी। इससे काफी दूरी पर दोनों की लाशें पड़ी थी। रेलवे ट्रैक भी पास में है। दोनों हाईवे से रेलवे ट्रैक की ओर भाग रहे थे। तभी उन्हें मारा गया।
विष्णु को नौ गोलियां लगीं
मनोज कुमार के सिर, सीने व पीठ में पांच गोलियां लगी हैं। विष्णु को नौ गोलियां लगीं। उसके सिर और सीने में गोलियां मारी गईं। कई गोलियां दोनों को छूकर निकल गईं।
आर्मी इंटेलिजेंस भी जांच में जुटी
फौजी की हत्या को सेना ने गंभीरता से लिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच में आर्मी इंटेलिजेंस के अधिकारी भी लगे हैं। इसके अलावा आगरा पुलिस अपनी खुफिया इकाई की मदद भी ले रही है। घटनास्थल के आस पास के लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
परिवार का है सेना से रिश्ता
मनोज के पिता रामौतार सेना के लेफ्टिनेंट पद से सेवानिवृत्त हैं, वहीं मनोज का भाई सुखबीर भी सेना में है। ग्रामीणों ने बताया कि पहली भर्ती में ही मनोज का चयन हो गया था। समाचार लिखे जाने तक मनोज का शव गांव में नहीं लाया गया था।
जम्मू के लिए चला था, यहां कैसे पहुंच गया
मृतक फौजी मनोज कुमार के पिता रामौतार, चाचा लालचंद व अन्य परिजन शुक्रवार सायं थाना फतेहपुर सीकरी पहुंचे। पिता व चाचा ने बताया कि एक महीने के अवकाश में 13 दिसंबर को मनोज गांव पहुंचा था और अचानक ही चार दिन पहले छुट्टियां खत्म होने की कहकर चला गया था। वह जम्मू जाने की बात कह रहा था, यहां कैसे पहुंच गया? परिजनों ने मौके से मिली कार एवं दूसरे मृतक विष्णु से अनिभिज्ञता जताते हुए कहा कि हमारा बेटा इतना दूर यहां कैसे पहुंचा, वे स्वयं असमंजस में हैं। गांव में किसी से कोई रंजिश नहीं है।
महिलाओं को नहीं दी वारदात की जानकारी
गांव जासावास में सेना के जवान की मौत के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। मनोज और उसके साथी की फतेहपुरी सीकरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही मनोज के पिता और कुछ अन्य परिजन फतेहपुर सीकरी के लिए शुक्रवार को रवाना हो गए थे। मनोज की मौत की जानकारी घर की महिलाओं को नहीं दी है। मनोज की हत्या की खबर वैसे तो पूरे गांव में फैल चुकी है लेकिन शव नहीं आने के कारण घर पर किसी महिला को इसकी जानकारी नहीं दी है। कुछ ग्रामीण गांव के बाहर ही खड़े हैं, जो परिवार तक किसी बाहरी व्यक्ति को जाने से रोक रहे हैं।