अवैध बूचड़खानों और बिना लाइसेंस चल रही मीट की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश आते ही मीट विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है। अब तक बिना लाइसेंस के दुकानें चला रहे मीट विक्रेता नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को नगर निगम में नए लाइसेंस के लिए आवेदन और पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण कराने वालों की लाइन लगी रही।
गौरतलब है कि शहर में वित्तीय वर्ष 2016-17 में नगर निगम ने 227 मीट के लाइसेंस पंजीकृत थे। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए नगर निगम ने करीब 181 लाइसेंस नवीनीकरण और नए लाइसेंस जारी किए। इसके बाद नए लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया को बंद कर दिया गया। शहर में सैकड़ों की संख्या में दुकानें बिना लाइसेंस की चलाई जा रही थीं।
सूबे का निजाम बदलने के साथ ही प्रदेश में अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों के खिलाफ अभियान चलना प्रारंभ हुआ तो मीट विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। बुधवार को बड़ी संख्या में मीट विक्रेता नगर निगम में पहुंच गए। उनकी मांग की थी उनकी दुकानों का लाइसेंस रिन्यू किया जाए और जिन लोगों के पास लाइसेंस नहीं है उन्हें लाइसेंस दिया जाए। पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों ने लाइसेंस देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया बंद हो गई और नए लाइसेंस अभी जारी नहीं किए जा रहे हैं। इस पर मीट विक्रेता नगर निगम में धरने पर बैठ गए।
हमारा तो रोजगार समाप्त हो जाएगा
निगम में मीट विक्रेताओं के साथ मुर्गी और मछली विक्रेताओं की लंबी लाइन थी। उनका कहना था कि इस तरह तो उनका रोजगार बंद हो जाएगा। परिवार को कैसे पालेंगे। जब हम लाइसेंस लेने को तैयार हैं तो नगर निगम लाइसेंस क्यों नहीं दे रहा है। कहा शहर के तीनों छोटे स्लाटर हाउस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद हो गए हैं तो अब छोटे जानवरों के वध के लिए कहां जाएं। कुबेरपुर स्थित यांत्रिक स्लाटर हाउस पर पशु कटान नहीं हो रहा है।
कोई भी मीट विक्रेता अवैध पशु कटान नहीं करना चाहता है। यदि नगर निगम सुविधा दे तो वो ऐसे क्यों करेंगे। अब लाइसेंस लेने वालों की लाइन लगी है लेकिन यहां लाइसेंस देने को तैयार नहीं है। इस तरह इनके परिवार सड़कों पर आ जाएंगे। नगर आयुक्त और डीएम से मिलकर इस समस्या पर बात करेंगे।
हाजी विलाल, पार्षद नगर निगम
लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए सभी को पर्याप्त समय दिया गया था लेकिन मीट विक्रेता लाइसेंस का रिन्यूवल कराने नहीं आए। अब रिन्यूवल की प्रक्रिया बंद कर दी गई है, नए लाइसेंस अभी जारी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों के जो निर्देश मिलेंगे उसके तहत काम होगा।
डा. योगेश शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी नगर निगम
कमेलों पर सख्ती से उड़े मांस विक्रेताओं के होश
सूबे के निजाम बदले तो मीट विक्रेताओं को लाइसेंस की याद आ गई। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को ही देख लीजिए। यहां भाजपा सरकार से पहले किसी ने भी पशु कटान और मीट बिक्री के लिए लाइसेंस को आवेदन नहीं किया था। बुधवार को हालत ऐसी थी कि विभाग में करीब 150 मीट विक्रेता लाइसेंस के लिए पहुंचे। हैरत की बात लाइसेंस के लिए एक भी आवश्यक मानक पूरा नहीं करते थे। ऐसे में अधिकारियों ने मानक पूरे करने के बाद आने को कहा।
लाइसेंस के लिए ये हैं आवश्यक
जिला अभिहित अधिकारी देवाशीष उपाध्याय ने बताया कि खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत लाइसेंस के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और संबंधित थाने से नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) अनिवार्य है। इसके अलावा कटान आवासीय क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए। पशु कटान के लिए प्री और पोस्ट मेडिकल की रिपोर्ट और वैज्ञानिक ढंग से पशुओं के अंगों का निस्तारण किया जाना चाहिए। इनका भौतिक निरीक्षण के बाद ही एफएसडीए लाइसेंस जारी करता है।
जिला जेल से लिया रिफाइंड का नमूना
एफएसडीए ने जिला जेल, सेंट्रल जेल और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय की पाकशाला का निरीक्षण कर जायजा लिया। यहां बनने वाले भोजन के दौरान साफ-सफाई का हाल जाना। एफएसडीए की टीम ने जिला जेल से रिफाइंड का सैंपल भी लिया।