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‘जाओ, अखबारवालों से ही इलाज कराना’

Wed, 23 Sep 2015 02:07 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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संवेदनहीनता के किस्से तो थे ही, अब तो मरीजों की ‘उफ’ भी डाक्टरों को गंवारा नहीं है। एसएन मेडिकल कालेज से एक मरीज को सिर्फ इसलिए वार्ड से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि उसकी मां ने अमर उजाला संवाददता से अपनी तकलीफें साझा कर ली थीं। उसे धमकाते हुए डाक्टरों ने कहा, ‘जाओ, अब अपनी बेटी का इलाज अखबार वालों से ही करा लेना।’ अमर उजाला संवाददाता से डाक्टराें की कारगुजारी सुन तुरंत पहुंचे प्राचार्य डा. एसके गर्ग ने मरीज को पुन: भर्ती कराया और चार दिन में उसका आपरेशन करने के आदेश दिए।
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फर्रुखाबाद निवासी रामा 10 साल की बेटी मोनिका को सिरदर्द के इलाज के लिए यहां लाई थीं। उसे एसएनएमसी में न्यूरोसर्जन डा. सौरभ शर्मा देखा। उन्होंने नसों में पानी होने की बात कहकर आपरेशन जरूरी बताया। रुपयों का इंतजाम कर रामा ने दो महीने पहले घड़ी वाली बिल्डिंग के सर्जरी विभाग में मोनिका को भर्ती कराया। आपरेशन के बाद भी मोनिका का दर्द न गया तो डाक्टर ने दूसरे आपरेशन की जरूरत बताई। इसी बीच सर्जरी विभाग नई आठ मंजिला बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया। तब से मोनिका को डाक्टर देखने नहीं आए। उसकी हालत बिगड़ने लगी तो रामा और उनके भाई रामबहादुर डा. शर्मा से मिले। उन्होंने कहा, आपरेशन थिएटर अभी तैयार नहीं है, इसके शुरू होते ही आपरेशन कर देंगे। मोनिका दर्द से चिल्लाती तो मां का कलेजा फट जाता लेकिन कोई चिकित्सक नहीं आता। यह सिलसिला दो माह से जारी है।
आपरेशन लटकाए जाने की खबर की तस्दीक के लिए अमर उजाला संवाददाता रामा से मिलने पहुंचा तो उनकी आंखें छलक पड़ीं। बताया, ‘रोज दवा पर करीब हजार रुपये खर्च उठाते-उठाते हम कर्ज में डूब गए हैं। भाई का ही सहारा है। उनकी भी माली हालत अच्छी नहीं। इधर कर्ज बढ़ राह उधर बेटी की हालत बिगड़ रही है। आपरेशन का इंतजार मजबूरी है।’ उनके संवाददाता से बातचीत करने की सूचना पाकर डाक्टरों ने शाम साढ़े सात बजे उन्हें बेटी समेत वार्ड से खदेड़ दिया।
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प्राचार्य पहुंचे, ढांढस बंधाया
मरीज को खदेड़े जाने की अमर उजाला से सूचना पाकर प्राचार्य डा. एसके गर्ग को सहसा विश्वास नहीं हुआ। हतप्रभ डा. गर्ग वार्ड ने पहले रामा से बात की फिर मरीज की फाइल देखी। पूछा कि किसके आदेश पर डिस्चार्ज किया गया। जूनियर डाक्टरों की चुप्पी पर उन्होंने इलाज कर रहे डा. सौरभ शर्मा को बुलवाया। उन्होंने इतने लंबे समय से आपरेशन न करने की वजह ओटी का तैयार न होना बताया। तब प्राचार्य ने मोनिका को भर्ती रखने और ट्रामा सेंटर में आपरेशन करने के साथ ही चार दिन में उसकी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।
 
साढ़े आठ बजे ही डाक्टर लापता
सर्जरी विभाग में मरीज रामभरोसे हैं। स्वयं प्राचार्य ने देखा। रात के 8:30 बजे उन्होंने विभाग का निरीक्षण किया। यहां वार्ड चार और दो में डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिला। वार्ड दो में एक जूनियर डाक्टर और नर्स थी। उन्होंने बताया कि सभी डाक्टर लाइब्रेरी गए हैं। यह सुन प्राचार्य का पारा चढ़ गया। पूछा, ‘रात में लाइब्रेरी...?’ हालांकि प्राचार्य के आने की खबर पाकर आनन-फानन सीनियर डाक्टर भी ड्यूटी पर आ गए। वे बहाने बनाने लगे तो प्राचार्य ने चेताया, ‘सुधर जाओ, नहीं तो...।’

वसूली की भी होगी जांच
आरोप है कि मोनिका के आपरेशन के लिए डाक्टरों ने किट (आपरेशन के दौरान इस्तेमाल होने वाले कपड़े) के लिए 950 रुपये वसूले थे। प्राचार्य एसके गर्ग ने कहा कि इसकी भी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी मिला उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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