कुलदीप ने दस खाते अपने दिए थे। छह खाते किराये पर अन्य लोगों के दिलाए थे। अशोक और दीपक इंटरनेट से सर्जिकल उपकरण, मास्क और सैनिटाइजर खरीदने वाली फर्मों का डाटा निकालते थे। दोनों रोजाना 200 लोगों का डाटा निकालते थे। इसके बाद व्हाट्स एप पर संदेश भेजते थे।
इसमें इंटरनेट से डाउनलोड की गई प्रोडक्ट की फोटो आदि शामिल थे। हकीकत में प्रोडक्ट नहीं होता था। इनके नीचे अपने रेट लिखते थे। बाजार में बिक रहे उसी तरह के सामान को आधी से भी कम कीमत में देने का झांसा देते थे। इससे लोग फंस जाते थे। आरोपियों के पास से बरामद रजिस्टर में फर्मों की जानकारी दर्ज है।
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सरगना कराते थे कॉल
पुलिस ने बताया कि सरगना जगदीश और चंद्रशेखर लोगों बात करते थे। उन्हें भरोसा देते थे कि सामान बिल्कुुल सस्ता है। यह सामान और कहीं नहीं मिलेगा। इसके बाद खाते में रकम जमा करा लेते थे। इस रकम को अशोक कुछ ही देर में एटीएम के माध्यम से निकाल लेता था।