मनोज गोयल ने अपने व्हाट्सएप नंबर पर जो डीपी लगा रखी थी, उसमें वह दो आईएएस और एक आईपीएस के साथ खड़ा नजर आ रहा था। यह डीपी करीब एक साल से लगी हुई थी।
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सौ करोड़ की तेल चोरी के मास्टरमाइंड बताए जा रहे मनोज गोयल पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई के दावे तो खूब किए जा रहे हैं लेकिन उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए कार्रवाई बहुत तेजी से नहीं जा रही है। पुलिस की ढिलाई साफ नजर आ रही है। अभी तक उसकी तलाश में न तो एसटीएफ को लगाया गया है। न ही आगरा क्राइम ब्रांच की मदद ली गई है।
मथुरा पुलिस ने दबिश भी दो-तीन जगह ही दी है। उसके आगरा के नेहरू नगर स्थित आवास पर एक ही बार पुलिस आई है। शाहगंज के सोरों कटरा के पुराने आवास पर तो एक बार भी नहीं गई है।
पेट्रोल पंपों में साझीदार उसके रिश्तेदारों से पूछताछ भी नहीं की गई है। पुलिस इन्हें आरोपी बनाने की बात कह रही है। फाइलें खंगाली जा रही हैं लेकिन इन पर अभी तक शिकंजा नहीं है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो अभी तक उसके मोबाइल की कॉल डिटेल रिकार्ड भी नहीं निकलवाई गई है। इससे पुलिसवालों के साथ उसके रिश्ते उजागर हो सकते हैं। उसके आगरा में कई ठिकाने हैं। दो कोठियां हैं। चार स्कूल हैं। यहां भी पुलिस ने अभी तक दबिश नहीं दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मथुरा पुलिस की ओर से कोई पत्र भी आगरा पुलिस के अफसरों को नहीं दिया गया है।
व्हाट्सएप से हटाई अफसरों वाली डीपी
मनोज गोयल ने अपने व्हाट्सएप नंबर पर जो डीपी लगा रखी थी, उसमें वह दो आईएएस और एक आईपीएस के साथ खड़ा नजर आ रहा था। यह डीपी करीब एक साल से लगी हुई थी। लेकिन बुधवार की सुबह उसने इसे हटा लिया है। यह नंबर भी बंद हो गया है। उसने अपना फेसबुक एकाउंट भी बंद कर लिया है।