झोलाछाप के क्लीनिक में आपरेशन के दौरान एक प्रसूता की मौत हो गई। घटना की जानकारी पर परिवारीजनों और ग्रामीणों जमकर हंगामा किया। मामला बिगड़ते देख स्टाफकर्मी मौके से भाग निकले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ग्राम धमैना निवासी बंटू उर्फ पटवारी की पत्नी जशोदा (25) को आठ अप्रैल को प्रसव पीड़ा होने पर क्षेत्रीय आशा कार्यकत्री उन्हें सीएचसी शमसाबाद ले गई। वहां ड्यूटी नर्स ने प्रसव कराने में असमर्थता जताते हुए एसएन अस्पताल आगरा ले जाने की सलाह दी लेकिन आशा के कहने पर उसे झोलाछाप के क्लीनिक (पहले कृष्णा अस्पताल के नाम से था, अब कोई नाम अंकित नहीं।) में ले गई। वहां आपरेशन के बाद प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया। दूसरे दिन तबियत बिगड़ने पर आगरा में दो अलग-अलग निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों के मना करने पर जयपुर इलाज के लिए ले गए। मंगलवार को जयपुर में उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना पर परिवारीजन और ग्रामीण भड़क गए। शव गांव पहुंचते ही वे झोलाछाप के क्लीनिक पर पहुंच गए। वहां उन्होंने जमकर हंगामा किया। वहां तैनात स्टाफ कर्मी मौके से भाग गए। परिजनों का आरोप है कि आपरेशन के नाम पर उनसे 30,000 रुपये ले लिए गए। इसके बाद भी लापरवाही के चलते प्रसूता की मौत हो गई। परिवारीजनों का कहना है कि उन्होंने मामले को लेकर थाना शमसाबाद में तहरीर दी है। जबकि पुलिस का कहना है कि उन्हें कोई तहरीर नहीं मिली है।
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आशाओं का ग्रुप करता है काम
शमसाबाद। कस्बे में लगभग आधा दर्जन झोलाछाप के क्लीनिक और अस्पताल संचालित हैं। इनके लिए आशाओं का एक ग्रुप काम करता है। जो सुनियोजित तरीके से मरीजों को झोलाछाप के पास तक ले जाता है। इसके बदले में उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बारे में कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि तीन साल पूर्व भी आपरेशन के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी।