जिस शहर की सड़कों पर शुक्रवार को करीब आधा दिन अरुण माहौर हत्याकांड का मामला गर्म रहा हो वहां शाम को एक नई सनसनी सामने आई। वाट्सएप ग्रुपों पर केंद्रीय हिंदी संस्थान (केएचएस) में बीफ पार्टी का मामला छाया रहा। विदेशी छात्रों के मीट काटते-पकाते फोटो के साथ लिखा गया है कि यह ‘बीफ’ है। संस्थान के अधिकारियों ने टिप्पणी करने से मना कर दिया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। रात करीब एक बजे सीओ हरिपर्वत अनुराग वत्स और सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान जांच के लिए केएचएस पहुंच गए थे।
कई वाट्सएप ग्रुप पर शुक्रवार को तीन विदेशी छात्रों के फोटो डाले गए। टेबल पर मांस पड़ा है। इसके टुकड़े किए जा रहे हैं। एक फोटो में मांस कढ़ाही में रखा है। दूसरे में कबाब की तरह सिंकता दिख रहा है। केंद्रीय हिंदी संस्थान के पुरुष हास्टल के गत 16 मार्च के बताए जा रहे इन फोटो के वायरल होते देर नहीं लगी। यही नहीं, यह सूचना अखबार के दफ्तरों तक भी पहुंचाई गई। बीफ के हल्ले से बगैर किसी तस्दीक सोशल मीडिया पर बहस-मुबाहिसे का दौर भी शुरू हो गया। हाल यह कि कुछ लोगों ने ‘अमर उजाला’ को फोन करके पूछा भी कि क्या शहर में कहीं बीफ पार्टी की सूचना मिली है। इस मामले में पूछे जाने पर एसपी सिटी सुशील घुले ने कहा कि कोई शिकायत आई तो जांच कराई जाएगी।
धुआं इस आग से तो नहीं उठा?
संभवत:, मामले की जड़ केएचएस के छात्र मुबीर द्वारा फेसबुक पर 10 जनवरी 2016 को डाली गई एक पोस्ट है जिसमें उसने अपना ‘राष्ट्रीय खाना’ बनाने की बात लिखी है। उसने इस व्यंजन का नाम भी लिखा है लेकिन ये दो शब्द विदेशी भाषा में लिखे गए हैं। संभवत: इसे ही बीफ मानकर हल्ला मचा हो। हालांकि वाट्सएप ग्रुप पर वायरल फोटो फेसबुक के इन फोटो से अलग हैं।
पर यूं पार्टी तो प्रतिबंधित है
वाट्सएप और फेसबुक की फोटो मांस खुले में पकाए जाने की हैं। जैसी चर्चा है, यह हास्टल में हुआ है तो यह बीफ भले न हो नियमों का उल्लंघन तो है ही। हास्टल में इस तरह भोजन पकाने की अनुमति नहीं है। जो आरोप अमर उजाला तक पहुंचे उसमें कहा गया कि छात्रों की बीफ पार्टी में बियर भी परोसी गई। फेसबुक की फोटो यदि हास्टल की हैं तो जाहिर है वहां ऐसा होना आम है।
संस्थान खामोश, मीडिया को नसीहत
संस्थान निदेशक प्रो. नंदकिशोर पांडे से जब इस संवाददाता ने फोन पर पूछा तो उन्होंने इसकी जानकारी न होने बात कहते हुए रजिस्ट्रार से बात करने को कहा। संस्थान रजिस्ट्रार चंद्रकांत त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। निदेशक ही बताएंगे। अच्छी खबरों की कवरेज न करने की शिकायत के साथ ऐसी बातों के पीछे न पड़ने की नसीहत दोनों ही अधिकारियों ने जरूर दी।