मेरठ में पकड़े गए आईएसआई एजेंट मोहम्मद इजाज ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के जाल बिछाने का तरीका भी बताया है। उससे मिली जानकारी के आधार पर खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि आईएसआई खास तौर से वेस्ट यूपी के उन लोगों पर नजर रखती है, जो कराची में अपनी रिश्तेदारी में लगातार जाते रहते हैं। पहले इनकी आर्थिक मदद की जाती है। फिर इन्हें जाली करेंसी और हथियार तस्करी जैसे जुर्म से जोड़ा जाता है। इसके बाद इनका इस्तेमाल स्लीपिंग मॉड्यूल्स के रूप में होता है।
इजाज को ऐसे कई मॉड्यूल्स के बारे में जानकारी दी गई थी। वह उनसे मिला भी था। इनमें ऐसे लोग भी हैं जिन्हें यह पता ही नहीं होता कि उन्हें आईएसआई किस तरह इस्तेमाल कर रही है? इनके पकड़े जाने पर ही खुलासा होता है।
दरअसल, वेस्ट यूपी के आगरा, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर समेत तमाम जिलों के हजारों लोगों की रिश्तेदार कराची में हैं। आईएसआई इनकी पुलिस में आमद के रिकार्ड पर नजर रखती है। जो बार-बार वहां जाते रहते हैं, आईएसआई सदस्य उनसे मेलजोल बढ़ा लेते हैं। फिर किसी बहाने से उनकी आर्थिक मदद करने लगते हैं। इसके बाद उन्हें गलत धंधों से जोड़ दिया जाता है।
जो एक बार फंस जाता है, उसका जासूसी कराने से लेकर जासूसों को ठहराने तक में इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इजाज से मिली इस जानकारी के बाद वेस्ट यूपी से बार बार पाकिस्तान जाने वाले और वहां से यहां आने वाले लोगों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
ऐसे ही फंसा था नईम खान
आईएसआई एजेंट आगरा के अछनेरा निवासी नईम खान को 2011 में पकड़ा था। वह पाकिस्तान गया था। वहीं पर आईएसआई के अधिकारियों ने उसे अपने संपक में ले लिया। इसकेबाद वह अछनेरा छोड़कर दिल्ली में रहने लगा। आईएसआई उसे पैसे भेजती रही। बाद में उससे जासूसी कराई गई। वह जेल में बंद है। मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहानरपुर में तो इस तरह जाल में फंसकर आईएसआई एजेंट बने लोगों की लंबी फेहरिस्त है।