आगरा के संरक्षण गृह में बिताए एक साल के दौरान 45 में से सात संवासनियां मां बनीं। इन्हें गर्भावस्था में यहां भेजा गया था। इनकी शादी भी नहीं हुई थी। इन्हें बहला फुसलाकर और अपहरण करके लाया गया था और इलाहाबाद में कोठों पर बेच दिया गया था।
कुल 67 संवासनियां भेजी गई थीं। इनके साथ 37 बच्चे थे। 22 संवासनियां पहले छोड़ी गईं। इनके साथ बच्चे भी गए। अब 45 संवासनियां और 11 बच्चे बचे थे। इनमें से 43 संवासनियां और नौ बच्चे छोड़ दिए गए।
जब संवासनियों ने अपने और अपने माता-पिता के नाम गलत बताए तो एसडीएम इलाहाबाद ने उनकी सही पहचान के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश दिया। नारी संरक्षण गृह की अधीक्षक से कहा गया था कि जो लोग खुद को इनके माता-पिता बता रहे हैं, उनके साथ इनके डीएनए का मिलान कराया जाए। तभी स्पष्ट होगा कि ये लोग सच बोल रहे हैं या झूठ। इसे भी अधीक्षक ने नहीं माना।