21 अप्रैल को निधि दीदी की शादी में रमा आंटी ने मेरे पापा सुनील गुलाटी का अपमान किया था, उन्हें बहुत भला बुरा कहा, उस समय तो मैं खून का घूंट पी गया, लेकिन अंदर ही अंदर मेरे मन में प्रतिशोध की आग जलती रही, आंटी का खून करके मैंने अपमान का बदला लिया, दीक्षा दीदी को इसलिए मारा, क्योंकि वह चश्मदीद गवाह थी।
यही वो कहानी है जो गौरव ने पुलिस को सुनाई है। उसने कितना झूठ बोला और कितना सच, यह तो वही जाने लेकिन उसे कत्ल का जरा भी अफसोस नहीं है। पुलिस ने उससे हुई पूछताछ की बाबत बताया कि उसने गुनाह इस तरह कुबूल किया, ‘शादी में पापा का जो अपमान हुआ, उससे मेरी बहन अंकिता भी बहुत दुखी थी। वह बार बार कहती थी, आंटी ने पापा के साथ ऐसा क्यों किया? उसकी बातें मेरे दिल को चुभती थी। मैंने ठान लिया कि बदला खून से लूंगा।’
मैं आंटी के घर पहुंचा, उन्होंने गेट खोला, मैं अंदर सोफे पर बैठ गया। आंटी ने फ्रूटी दी, मैं उसे पी ही रहा था कि मन में अपमान का बदला लेने की बात आ गई। आंटी रसोई में बोतल में पानी भर रहीं थी। मैंने वहीं से रस्सी उठाई और उनका गला घोटने लगा। वे बाहर की ओर भागी तो किचन से उठाकर सब्जी काटने का चाकू उनके पेट में घोंप दिया। वे संघर्ष करने लगी, तो चकला उठाकर उनके सिर में दे मारा।
यह देखकर दीक्षा चीखने लगी। मैंने चकले के टुकड़े एक कपड़े में लिए और दीक्षा को घसीटकर बाथरूम में ले गया। वहां उसे तब तक मारता रहा जब तब की वो मर नहीं गई। बाथरूम का ताला लगा दिया। इसके बाद आंटी की लाश घसीटकर दूसरे बाथरूम में बंद कर दी। इससे पहले दोनों के शव से जेवरात लूट लिए।
मेरे कपड़े खून से सन गए थे, उन्हें अंकल की फाइलें लेकर उनके साथ जला दिया और उनके कपड़े पहन लिए। तभी अंकल बाहर गेट पर आ गए, उन्होंने आंटी को फोन किया, मैंने उनका मोबाइल स्विच ऑफ किया और जेब में रख लिया। फिर अपने हाथ धोए। इसके बाद छत पर गया। वहां मल्होत्रा नर्सिंग होम के गटर में चकला, बेलन, अपनी चप्पल फेंक दी और कूदकर एक्टिवा से भाग निकला। इसके बाद आंटी का मोबाइल सिकंदरा में झाड़ी में फेंक दिया। फिर राजकमल सागां एम्पोयिरम पहुंचकर अपने कपडे़ लिए और टीपी नगर बस अड्डे पर चल दिया।
आगरा आते ही बदल गई गौरव की जुबान
आगरा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कसौली में पकड़े जाने के बाद गौरव ने कत्ल की कुछ और वजह बताई थी। उसका कहना था कि वह ताई के पास 50 हजार रुपये मांगने गए था, क्योंकि उसकी जेब खाली हो चुकी थी और उसे नशे के लिए पैसे की जरूरत थी। ताई ने मना कर दिया, इसी पर कहासुनी हो गई। उन्होंने पापा के बारे में उल्टा-सीधा कहा तो वह आपा खो बैठा और उनके सिर में बेलन मार दिया। उन्होंने चाकू उठाकर उसे मारा तो उसके सिर पर खून सवार हो गया और फिर पहले ताई और इसके बाद बहन का खून कर दिया। पैसे की आवश्यकता थी, इसलिए लूट की। लेकिन आगरा में आते ही वह अपमान के बदले खून की कहानी सुनाने लगा। पुलिस ने इसे ही सच माना है।
मैंने अपनी बहन को मुक्ति दे दी
दीक्षा की हत्या की वजह पूछने पर उसका कहना था कि मैंने अपनी बहन को मुक्ति दे दी है। मैं उसे मारने के उद्देश्य से नहीं गया था। उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।
कसौल में आसानी से मिल जाता है कमरा
हिमाचल प्रदेश के कसौल में होटल में कमरा आसानी से मिल जाता है। इसके लिए अपनी आईडी भी देने की जरूरत नहीं है। जिस होटल में सभी दोस्त ठहरे थे, वह मात्र 200 रुपये प्रतिदिन किराये पर लिया गया था।
पुलिस टीम में ये रहे शामिल
एसएसआई शैलेश कुमार सिंह, एसआई गिरीश चंद गौतम, ओमप्रकाश सिंह, अभय प्रताप सिंह आदि शामिल रहे। टीम को पुरस्कृत किया गया है।
भरोसे का भी खून
प्रवीन गुलाटी चार भाई थे, राजेश की मौत हो गई। अब सबसे बड़े देवेंद्र, उनसे छोटे प्रवीन और सबसे छोटे सुनील गुलाटी हैं। गौरव के पिता सुनील गुलाटी प्रतापपुरा में दो भाइयों के साथ पैतृक मकान में रहते हैं। सुनील एक गैराज में मैकेनिक हैं। पुलिस ने बताया कि आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। गौरव होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है। उसके खर्चे अधिक थे। प्रवीन छोटे भाई के परिवार की मदद करते रहते थे। गौरव ताऊ से ही मदद मांगा करता था। कभी दो तो कभी पांच हजार रुपये तक मांगकर ले जाता था। इस बात का रमा विरोध किया करती थीं। प्रवीन भी उसे हर बार पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए खर्च दिया करते थे। बेटे की तरह मानते थे। वह पढ़ाई पर ध्यान दे सके इसके लिए कभी-कभी ट्यूशन भी देते थे।
कत्ल के बाद मौज मस्ती की गौरव ने
अपनों का कत्ल करने के बावजूद आंखों में कोई अफसोस नहीं। उसने कुल्लू, मनाली और कसोली में मौज मस्ती की। रेव पार्टी में भी गया। उसे लग रहा था कि पुलिस उसे पकड़ ही नहीं पाएगी। जेल जाने के बारे में पूछने पर कहता रहा कि अब जल्दी करो यहां क्यों खड़े हैं।
हत्यारोपी गौरव को पुलिस लाइन लाया गया था, मगर पहले तो उसने सबके सामने चेहरा उठाए रखा। जब फोटोग्राफरों ने उसकी फोटो खींचे तो कुछ देर के लिए अपनी नजरें झुका ली। इसके बाद फिर से अपने अलग अंदाज में आ गया। उसने जो कुछ किया उसे देखकर और सुनकर लोगों के रौंगटे तक खड़े हो गए। मगर, उसे कोई अफसोस नहीं है। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि कत्ल के बाद वह 24 जून को कसौली पहुंचा। देहरादून मेें रहने वाले दो दोस्त दिल्ली में थे। उन्हें फोन करके बुला लिया। 27 को आगरा में रहने वाले दो और दोस्तों को फोन करके बुलाया। पार्टी खर्च भी खुद ही करने को कहा। होटल में आसानी से कमरा मिलने के बाद एक दिन रेव पार्टी में सभी दोस्त गए। गौरव ने लूटे हुए रकम से ही नौ हजार रुपये खर्च कर डाले। यहीं पर चरस और बीयर का नशा भी किया। किसी दोस्त को ताई और बहन के कत्ल की भनक नहीं लगने दी।
घर से लूट लिए जेवरात-नकदी
गौरव ने हत्याकांड को अंजाम देने के बाद ताई के टॉप्स-अंगूठी, सोने के जेवरात, शादी में देने के लिए बनाए गए रुपयों से भरे लिफाफे, तकरीबन साढ़े 26 हजार रुपये भी ले गया था।
पहले पहुंचा था मोबाइल उठाने
गौरव ने अपना मोबाइल खंदारी स्थित मनीष हार्डवेयर की दुकान पर गिरवी रख दिया था। ताऊ के घर जाने से पहले वह अपना मोबाइल उठाने पहुंचा, लेकिन मनीष ने बिना पैसा मोबाइल वापस करने से मना कर दिया था। हत्या के बाद मोबाइल उठाकर ले गया था।
...तब दरवाजे पर खड़े थे प्रवीण
जिस वक्त हत्यारोपी गौरव घर से भागने की फिराक में था, तभी प्रवीण गुलाटी भी पहुंच गए थे। उन्होंने दरवाजा पीटना शुरू कर दिया। यह देखकर गौरव घबरा गया। दीक्षा के कमरे में रखा मोबाइल भी बजने लगा। उसे स्विच आफ कर दिया। उसने खून से सना सभी सामान समेट लिया, जिससे वह पकड़ा नहीं जाए। डिटॉल से घाव साफ करने के बाद वह छत के रास्ते से पीछे कूद गया। सामान गटर में फेंकने के बाद भाग निकला। सिकंदरा क्षेत्र में घर से उठाया मोबाइल फेंककर चला गया।
गौरव न भागता तो भटकती रहती पुलिस
आगरा। गौरव गुलाटी ने जितनी बेदर्दी से रमा और दीक्षा का कत्ल किया, उतनी ही सफाई से सुबूत मिटाए। फील्ड यूनिट को उसके फिंगर प्रिंट तक साफ नहीं मिले थे। उसने लूटपाट करके मामला और उलझा दिया। अगर वह दुख बांटने के लिए आ जाता तो उस पर शक होना भी मुश्किल था। पुलिस सक्रिय चल रहे लुटेरों की तलाश में ही भटकती रहती।
उसके भाग जाने से ही उस पर शक की सुई घूमी। इसके बाद सर्विलांस ने ऐसा सुबूत दिया कि पुलिस का काम आसान हो गया। गौरव का प्रवीण गुलाटी के घर आना बहुत कम था। उनकी बेटी निधि की 21 अप्रैल को शादी के बाद वह पहली बार पहुंचा था। उसका कभी उनसे झगड़ा भी नहीं हुआ था। इसलिए उस पर शुरू में शक नहीं हुआ। जब वह अगले दिन दाह संस्कार में नहीं पहुंचा तो रिश्तेदारों में इसको लेकर चर्चा शुरू हुई। इसी को पुलिस ने सुन लिया। उसका फोन सर्विलांस पर लगाया तो हत्या के वक्त उसकी लोकेशन खंदारी मिली। इसके बाद तो सुराग मिलते चले गए।
अगर वह हत्या के बाद मगरमच्छ के आंसू बहाने के लिए गुलाटी परिवार से मिलने आ जाता तो उस पर शक होना मुश्किल था। न उसका मोबाइल सर्विलांस पर लगाया जाता और न ही सुबूत मिलते।
ऐसे उठा रहस्य से परदा
- शुरू से ही शक था कि हत्यारा करीबी है, वह मेन गेट से आया था, रमा ने उसे गिलास में कोल्ड ड्रिंक भी दी थी।
- प्रवीण गुलाटी के सभी रिश्तेदार दुख बांटने आए। गौरव के नहीं आने से पुलिस के शक की सुई उस पर टिक गई।
- सर्विलांस से उसके मोबाइल फोन की लोकेशन घटना के समय खंदारी की मिली, इससे शक यकीन में बदल गया।
- वह उठावनी में भी नहीं पहुंचा तो उसकी तलाश शुरू कर दी गई, पता चला कि वह हिमाचल के कुल्लू में छुपा है।
- पुलिस उसे पकड़ने गई तो कुल्लू से मनाली होते हुए कसौली जा चुका था, वहीं से उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
साक्ष्य
- लूटे गए जेवरात और कैश की गौरव गुलाटी से बरामदगी हुई है।
- हत्या में इस्तेमाल चकले, बेलन से मिले फिंगर प्रिंट का मिलान होगा।
- मौके से मिले हत्यारोपी के खून का डीएनए परीक्षण होगा।
- गौरव के मोबाइल फोन की लोकेशन भी बड़ा सुबूत बन गई है।
- उसने खून से सने अपने जो कपड़े जलाए, वे भी साक्ष्य हैं।
रिकवरी
- एक जोड़े सोने के टॉप्स रमा गुलाटी के और एक जोड़े ही दीक्षा के
-। एक सोने की अंगूठी
23 जून : कब क्या हुआ था
- दोपहर 1:16 बजे : गौरव प्रतापपुरा में अपनी आंटी स्वीटी के पास पहुंचा।
- 1:20 बजे : स्वीटी से 50 रुपये लेकर एक्टिवा से चल दिया।
- 1:30 बजे : प्रवीण गुलाटी के घर पहुंचा, रमा ने दरवाजा खोला।
- 1:35 बजे : अनुमान है कि उसने रमा गुलाटी का खून इस समय किया।
- 1:40 बजे : उसका कहना है कि पांच मिनट बाद ही दीक्षा को मारा।
- 1:45 बजे : गौरव ने बताया कि पांच मिनट में दोनों लाशें अलग अलग बाथरूम में बंद की।
- 1:48 बजे : गौरव के मुताबिक दो-तीन मिनट बाद ही खून से सने कपड़े जलाए।
- 1:53 बजे : अधिवक्ता प्रवीण गुलाटी पहुंच गए, घंटी बजाने लगे, रमा के फोन पर कॉल की।
- 1:55 बजे : गौरव ने रमा का फोन स्विच ऑफ किया, अपने हाथ डेटॉल से धोए।
- 2:00 बजे : चकला, बेलन एक तौलिए में लेकर छत पर पहुंचा, इन्हें गटर में फेंक दिया।
- 2:02 बजे : गटर के पास के रास्ते से ही सड़क पर आया, एक्टिवा उठाकर भाग निकला।