शहर की एक और डाक्टर भ्रूण लिंग जांच करते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई है। हरियाणा और आगरा के स्वास्थ्य विभाग ने रुनकता स्थित भरत भार्गव हास्पिटल से डा. रेनू भार्गव, ड्राइवर विजय पाल निवासी शास्त्रीपुरम, सफाई कर्मचारी तुलसी, इसके पति ओमवीर निवासी अरतौनी को मौके से पकड़ लिया। एजेंट नईम निवासी अरतौनी भाग जाने में सफल रहा। टीम ने सेंटर की सील करते हुए अल्ट्रासाउंड फिल्म, रिपोर्ट, रजिस्टर जब्त किए हैं। चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग के हत्थे एक एजेंट लगा था। इससे पता चला कि आगरा में स्थित भरत भार्गव हास्पिटल में भ्रूण लिंग जांच कराता है। इस पर हरियाणा के पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रभारी डा. संजीव भगत ने आगरा के डीएम को अवगत कराया। डीएम ने एसीएम प्रथम के नेतृत्व में गोपनीय टीम बनाई। दोपहर को दो महिला (डमी मरीज) और एक पुरुष को साथ लिया। एजेंट ने आगरा के एजेंट से फोन पर बात की और 14,000 रुपये में बात तय हुई। सेंटर पर पहुंचने पर नईम नाम का एजेंट मिला। इसे 14 हजार रुपये थमा दिए। उसने सफाई कर्मचारी तुलसी को एक हजार रुपये दिए। इसके साथ इसका पति ओमवीर भी था। नईम ने सफाई कर्मचारी के साथ मरीज को अंदर भेज दिया। इसी बीच टीम ने धावा बोलकर चार को पकड़ लिया। मौके से सफाई कर्मचारी से एक हजार रुपये बरामद कर लिए। आगरा के स्वास्थ्य विभाग के पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रभारी डा. वीरेंद्र भारती ने बताया कि डमी मरीज के पेट पर जैली लगी हुई थी। सफाई कर्मचारी से नंबरी रुपये बरामद किए। नईम 13 हजार नंबरी रुपये लेकर भाग गया। सेंटर सील कर रिकार्ड जब्त किए हैं।
दो बार सील हो चुका है सेंटर
भ्रूण लिंग जांच करने वालों पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मेहरबानी बरतने में कसर नहीं छोड़ता। डा. रेनू को स्वास्थ्य विभाग ने 2015 में भी पकड़ा था। इनके क्लीनिक पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर भी एकसाथ लगी थी। एजेंट से पता चला कि गर्भ में बेटी-बेटा होने पर इनकी ओर इशारा किया जाता। सेंटर सील कर दिया गया था, लेकिन तत्कालीन डीएम ने चेतावनी देकर सेंटर को बहाल कर दिया। इससे पहले 2012 में पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लघंन करने पर भी सेंटर सील हुआ था।
ये घटना शर्मसार करने वाली: आईएम अध्यक्ष
भ्रूण लिंग जांच में अगर कोई चिकित्सक संलिप्त पाया जाता है, तो ये चिकित्सकीय जगत के लिए शर्मसार है। आगरा में पकड़े जा रहे मामलों में कानून कार्य करेगा, लेकिन नैतिकता के नाते आईएमए इसकी घोर निंदा करती है। ऐसे डाक्टरों का बहिष्कार है, सभी से अपील है कि ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाए, जिससे चिकित्सकों को शर्मसार होना पडे़।
लगातार पकडे़े जा रहे मामले
पांच अप्रैल: राजस्थान पुलिस ने ट्रांसयमुना कॉलोनी स्थित विद्या नर्सिंगहोम में डा. विद्या गुप्ता, नर्स मनोरमा ठाकुर, एजेंट रामकिशोर यादव को पकड़ा।
छह अप्रैल: भ्रूण लिंग जांच का मास्टर माइंड चमकलाल भी पुलिस के हत्थे चढ़ा। ये ट्रांस यमुना कॉलोनी में चमकलाल अल्ट्रासाउंड चलाता था। 2015 में सेंटर सील होने के बाद से फरार चल रहा था।
12 अप्रैल: ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित बांकेबिहारी हास्पिटल में सेंटर सीज किया। ये डा. विद्या गुप्ता के पति डा. उमाकांत गुप्ता का था।
एसीएम प्रथम एके सिंह ने बताया कि पुलिस-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में डा. रेनू भार्गव को रंगेहाथ भ्रूण लिंग जांच करते हुए पकड़ा है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बहुत लकी हो...बेटा है
आगरा। जल्दी लेटो, पेट पर जैली लगाई और जांच शुरू। करीब दस मिनट बाद, बधाई हो...बेटा है। बहुत लकी हो तुम...। ये शब्द उस चिकित्सक के थे, जो खुद एक बेटी थी। ये कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में कोख में बेटियों की पहचान करने वाली ये दूसरी महिला चिकित्सक हैं। इससे पहले ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित विद्या नर्सिंग होम की डा. विद्या गुप्ता भी पकड़ी गई थी। पीसीपीएनडीटी एक्ट प्रभारी डा. वीरेंद्र भारती ने बताया कि सफाई कर्मचारी तुलसी से जब पूछा गया तो उसने बताया कि डाक्टर ने जांच करने के बाद मरीज को बताया कि पेट में बेटा है।
अब हरियाणा तक भी रैकेट
कोख में बेटियों की पहचान करने के लिए आगरा मुख्य अड्डा बनता जा रहा है। अभी तक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मामले ही पकड़ में आए थे। ये पहला मौका है जब हरियाणा तक इसके तार जुड़े हुए हैं। हरियाणा के फरीदाबाद के एजेंट के पकड़ में आने से साफ है कि बडे़ पैमाने पर ये धंधा चल रहा है।