पुलिस हिरासत में विजयपाल जाटव की मौत का मामला गरमाने लगा है। जाटव समाज ने आरोपी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर आमरण अनशन पर बैठने की धमकी दी है। वहीं सर्व समाज के लोग पुलिस के बचाव में आ गए हैं। उन्होंने पुलिस के खिलाफ मुकदमा वापस नहीं होने पर मतगणना कार्य रोकने की चेतावनी दी है। दोनों ही पक्षों ने बुधवार को इस संबंध में नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपे।
बता दें कि 22 अक्तूबर की रात भागूपुर की ठार निवासी विजयपाल जाटव पुत्र कालीचरन की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। इस संबंध में सीओ और इंस्पेक्टर सहित 11 पुलिस वालों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। इनमें पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। बुधवार को विजयपाल के परिवारीजन समाज के लोगों के साथ तहसील पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल के नाम छह सूत्रीय पत्र नायब तहसीलदार डॉ. गजेन्द्रपाल सिंह को सौंपा। इसमें हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने, परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने, एसपीआरए बबिता शाहू को हटाने की मांग की। कहा कि यदि एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुईं तो आमरण अनशन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में रामनरेश, अमर सिंह, घनश्याम दास, सोबरन सिंह, त्रिलोक सिंह आदि शामिल रहे।
वहीं, सर्वसमाज के लोगों ने एसएसपी के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिन में पुलिस के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं हुआ तो व्यापारी दुकानें बंद रखेंगे। एक नवंबर को होने वाली मतगणना को भी नहीं होने देंगे। एसएसपी और डीएम कार्यालय का घेराव भी करेंगे। ज्ञापन देने वालों में राकेश बघेल, हाजी फरीद खां, काले कुरैशी, चंद्रकाश, नीरज जैन आदि शामिल रहे।