सराफ धन कुमार जैन को गोली मारे जाने की सनसनीखेज वारदात का आनन-फानन में खुलासा किया जाना पुलिस को भारी पड़ सकता है। क्योंकि इसके लिए तैयार की गई कहानी सच साबित नहीं हो पा रही है। पुलिस का कहना है कि प्रमोद को योगेश ने अपना नाम बदलकर पहले यशवंत नर्सिंग होम में भर्ती कराया और फिर एसएन मेडिकल कालेज में। लेकिन नर्सिंग होम का रिकार्ड बताता है कि उसे पुलिस ने वहीं से अपनी कस्टडी में ले लिया था। इसके बाद भला योगेश उसे एसएन में कैसे भर्ती करा सकता है? इन हालातों में यह कहानी अदालत में झूठी साबित को सकती है।
प्रॉपर्टी डीलर योगेश को पुलिस ने साजिश का आरोपी बनाया है, जबकि उसके कर्मचारी प्रमोद को गोली मारने का। पुलिस की कहानी का मुख्य आधार यह है कि प्रमोद की बायीं जांघ में गोली लगने का निशान है। पुलिस का दावा है कि घटना के दौरान धन कुमार जैन के प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड जितेंद्र की 315 बोर की राइफल से चली गोली ही उसे लगी थी, यह उसी का निशान है। उसे गोली 22 नवंबर की रात 9:45 बजे लगी थी, जबकि वह न्यू आगरा के यशवंत नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया 23 की अलसुबह 3:55 बजे। सवाल यह है कि क्या राइफल की गोली लगा शख्स 6 घंटे 10 मिनट तक बगैर उपचार के ठीक हालत में रह सकता है?
बहरहाल, नर्सिंग होम के सूत्रों ने बताया कि यहां के रिकार्ड के मुताबिक ,सुबह आठ बजे इसकी सूचना न्यू आगरा थाना पुलिस को दी गई। इसके एक घंटे बाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई। पुलिस का कहना है कि उसे योगेश ने भर्ती कराया लेकिन रिकार्ड में उसके पिता देवी सिंह का नाम दर्ज है।
इससे बड़ा झूठ एसएन मेडिकल कालेज में सामने आता है। कालेज के सूत्रों ने बताया कि यहां प्रमोद को भर्ती कराया गया दोपहर 1:40 बजे। इमरजेंसी के रजिस्टर में भर्ती कराने वाले का नाम लिखा है देवी सिंह यानी प्रमोद के पिता। अब सवाल यह है कि जब प्रमोद को सुबह नौ बजे पुलिस ने कस्टडी में ले लिया, तो वह देवी सिंह के पास कैसे पहुंच गया?
सीसीटीवी फुटेज दिखाए पुलिस
पुलिस का कहना है कि प्रमोद को एसएन में योगेश ने अपना नाम देवी सिंह बताकर भर्ती कराया। योगेश के परिवारीजनों का कहना है कि पुलिस अगर सच बोल रही है तो एसएन मेडिकल कालेज में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मीडिया को दिखा दे? दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
सुबह 3:55 बजे
यशवंत नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया
सुबह 8:0 बजे
नर्सिंग होम से पुलिस को सूचना भेजी गई
सुबह 9:0 बजे
पुलिस प्रमोद को अपने साथ ले गई
दोपहर 1:40 बजे
एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया
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पुलिस का कहना है कि यशवंत हास्पिटल में प्रमोद नाम बदलकर भर्ती हुआ था। जबकि अस्पताल के रिकार्ड में उसका नाम प्रमोद ही दर्ज है। रजिस्टर में लिखा है कि उसे उसके पिता देवी सिंह ने भर्ती कराया।
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पुलिस का कहना है कि प्रमोद को एसएन में योगेश ने अपना नाम बदलकर भर्ती कराया था। लेकिन जब वह पुलिस की कस्टडी में था, तो योगेश भर्ती कैसे करा सकता है।
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पुलिस का कहना है कि प्रमोद के एसएन में भर्ती होने की जानकारी योगेश से पूछताछ में दोपहर 2:30 बजे के बाद मिली। जबकि पुलिस सुबह नौ बजे ही उसे कस्टडी में ले चुकी थी।
पहचान कौन?
पुलिस का कहना है कि प्रॉपर्टी डीलर योगेश ने धन कुमार जैन की पहचान कराने के लिए उनका फोटो व्हाट्स एप पर प्रमोद से शेयर किया था। लेकिन पुलिस ने यह नहीं बताया कि योगेश प्रॉपर्टी डीलर है और प्रमोद उसका कर्मचारी। भला उसे फोटो व्हाट्स एप पर शेयर करने की जरूरत क्या थी? और इस फोटो से पहचान कैसे हो सकती है? इसमें तो कई और चेहरे भी नजर आ रहे हैं।