डीजीपी जावीद अहमद ने कहा है कि जवाहर बाग की हिंसा के दौरान मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव को छोड़कर भागने वाले पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर लिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। 30 दिन के भीतर ही इन पर कार्रवाई कर दी जाएगी।
मुख्य सचिव दीपक सिंघल, डीजीपी जावीद अहमद और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पांडा ने सर्किट हाउस में आगरा जोन के आठों जनपदों के एसपी/एसएसपी और डीएम के साथ अपराध समीक्षा की। इसके बाद प्रेस से मुखातिब डीजीपी ने मथुरा के जवाहर बाग में दो जून को हुई हिंसा में भाग खड़े हुए पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर कहा कि कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
बता दें, मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव के साथ नौ हमराह, तीन सीओ और तीन एसओ थे। माना जा रहा है कि सभी उन्हें छोड़कर भाग गए थे। इसमें हमराह को निलंबित किया जा चुका है। विभागीय जांच के बाद इनकी बर्खास्तगी हो सकती है। सीओ और एसओ पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बुलंदशहर गैंगरेप के खुलासे को फर्जी बताए जाने के सवाल पर डीजीपी का कहना था कि इसमें कुल छह अपराधी पकड़े गए है। इनकी पहचान पीड़िताओं ने की है। जहां तक नाम बदल जाने का सवाल है, अपराध नाम ने नहीं, व्यक्तियों ने किया है। शुरू में उन्होंने अपने नाम और पते कुछ और बताए थे, बाद में वेरिफिकेशन हुआ तो कुछ और निकले। घुमंतु अपराधी अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नाम से रहते हैं। खुलासा एकदम सही हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस घटना केबाद 542 थाना क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले प्रदेश के 10 हाईवे चिह्नित कर इन पर रात में 10 से सुबह 4:30 बजे तक पेट्रोलिंग कराई जा रही है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। अक्तूबर में डायल 100 शुरू होने पर इसकी 3,200 गाड़ियां भी हाईवे पर रात्रि पेट्रोलिंग में लगाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक मामलों पर पुलिस का जीरो टोलेरेंस रहना चाहिए। इसके अलावा दबंगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया है।