बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से 2500 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर हड़प जाने वाले कैलाश श्रीराम अग्रवाल को लेकर सीबीआई मुंबई की आर्थर रोड जेल से लेकर यहां सीजेएम कोर्ट पहुंची। उस पर आगरा की फर्म एसई इन्वेस्टमेंट को 33 करोड़ रुपये चूना लगाने का केस भी दर्ज है।
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इसी मामले में उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे तीन अक्तूबर को फिर से तलब किया है। वह देश के टॉप टेन विलफुल डिफाल्टरों (कर्ज लेकर हड़प जाने वालों) में शामिल है।
वह मुंबई के पॉवर क्रास रोड वायुकुला का रहने वाला है। उसकी फर्म वरुण इंडस्ट्रीज है। उसे सीबीआई ने 12 अगस्त को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेकर उसे हड़प जाने के बाद वह दुबई भाग गया था।
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वहां से जैसे ही लौटा, सीबीआई ने धर लिया। उसके और उसके साथियों के खिलाफ बैंकों और फाइनेंस कंपनियों ने तमाम केस दर्ज करा रखे हैं। इन्हीं में से एक आगरा की एसई इन्वेस्टमेंट का मामला है।
2014 दर्ज कराया केस
कंपनी का आफिस संजय प्लेस में है। इसके स्थानीय अधिकारी महेश कुमार ने 11 सितंबर, 2014 को हरीपर्वत थाने में केस दर्ज कराया था। इसमें कैलाश के साथ उसके पास ही रहने वाले किरन कुमार, नवरतन मल मेहता और दो अन्य अब्दुल जब्बार और विपिन आप्टे भी आरोपी हैं। कैलाश, किरन और नवरतन ने 2011 में अपनी कंपनियों के शेयर गिरवी रखकर एसई इन्वेस्टमेंट से 30 करोड़ का लोन लिया था।
बाद में दस्तावेज में हेराफेरी कर शेयरों में गिरावट दिखाई और 33 करोड़ (तीन करोड़ ब्याज मिलाकर) का कर्ज हड़प लिया। कोर्ट ने कर्ज चुकाने का आदेश दिया, लेकिन इन लोगों ने नहीं चुकाया। पुलिस ने 29 जुलाई, 2017 को इनके खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी लेकिन वे तलब किए जाने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुए। अब बी वारंट पर कैलाश को सीबीआई ने पेश किया है। पेशी के बाद उसे वापस मुंबई ले गई। एसई इन्वेस्टमेंट की ओर से पैरवी एडवोकेट रवि अरोड़ा ने की।
विदेश भाग गए दो आरोपी
कैलाश को तो एयरपोर्ट से सीबीआई ने पकड़ लिया लेकिन दो डिफाल्टर किरन और नवरतन हाथ नहीं आए। दोनों विदेश भाग गए हैं। सीबीआई उनकी तलाश कर रही है। इन लोगों ने 2007 से 2012 के बीच 1500 करोड़ से अधिक लोन लिया। 2013 में डिफाल्टर होने लगे।
आगरा में कैलाश, किरन और नवरतन के खिलाफ एफआईआर हो चुकी थी। चार्जशीट भी हो गई थी लेकिन वे धोखाधड़ी से बाज नहीं आए। उन्होंने चार्जशीट के बाद 300 करोड़ का घपला किया। इंडियन बैंक मुंबई की ओर से इसकी एफआईआर 30 मार्च, 2016 को दर्ज कराई गई।