फतेहपुर सीकरी के किला गेट से पुलिस को मिली
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फतेहाबाद में ससुराल से लापता जिस शकुंतला को मायके वाले मृत समझ चुके थे, वह जिंदा निकली। 18 दिन बाद पुलिस को वह फतेहपुर सीकरी के किला गेट से मिली। वह भरतपुर में अपने परिचित की मदद से किराये पर कमरा लेकर रह रही थी। उसे परिवारीजनों के हवाले कर दिया गया है।
एसपीआरए अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि डौकी निवासी शकुंतला की शादी 2010 में फतेहाबाद निवासी विजयपाल से हुई थी। 19 अप्रैल से वह लापता थी। घरवालों ने ससुरालियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। हत्या की आशंका भी जाहिर की थी। 22 अप्रैल को शंकरपुर घाट पर यमुना में एक युवती का शव मिला। घरवालों ने इसके शकुंतला का शव होने का दावा किया और पोस्टमार्टम की मांग की। वहीं एक दूसरे परिवार ने इसे अपनी बेटी का शव बताया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि शव का पहले भी पोस्टमार्टम हो चुका है। मगर, शकुंतला के परिवारवाले इसे मानने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार भी खुद ही कर दिया।
बाद में पुलिस को जांच में पता चला कि शकुंतला भरतपुर मेें है। पुलिस टीम को वह वहां मिली। पूछताछ में उसने बताया कि पति फौज की तैयारी कर रहा था, लेकिन नौकरी नहीं लग सकी। वह आए दिन मारपीट करता था। उसके उत्पीड़न से परेशान होेकर वह घर छोड़कर भरतपुर में अपने परिचित के पास चली गई। उसने उसे किराये पर कमरा दिला दिया था। एसपीआरए ने बताया कि शकुंतला के परिवारीजनों ने गलत तरीके से लाश की शिनाख्त की। आशंका है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है। अब गलत शिनाख्त करने के मामले में उन पर कार्रवाई के लिए विधिक राय ली जा रही है।
यमुना मिली लाश रोशनी की थी
पोखर पांडे निवासी भूरी सिंह ने दावा किया था कि यमुना में मिला शव रोशनी का था। रोशनी की सरमथुरा थाना क्षेत्र में दुर्घटना में मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के बाद यमुना में प्रवाहित कर दिया था।