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बुखार ने बिगाड़ दिया घर का बजट 

Mon, 12 Sep 2016 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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fever - फोटो : amar ujala
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वायरल फीवर के बढ़ते मरीजों से प्राइवेट हास्पिटल संचालकों की चांदी हो गई है। अगर मरीज प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती है तो उसके घर का बजट बिगड़ना तय है। प्लेटलेट्स 40 हजार से कम होते ही मरीजों को आईसीयू में भर्ती कर जंबो पैक की डिमांड कर दी जाती है। ऐसे में मरीज के इलाज का एक दिन का औसतन खर्च चार से आठ हजार रुपये आ रहा है।
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डिस्चार्ज के वक्त मरीजों को बिल की पक्की रसीद तक नहीं दी जा रही। यमुनापार के हास्पिटल में एत्मादपुर के राजवीर सिंह बघेल का मरीज भर्ती है। उन्होंने बताया कि प्लेटलेट्स 41 हजार बताई हैं। डेंगू की कह रहे हैं, दो दिन में नौ हजार रुपये खर्च हो गए। हालत नहीं सुधरी तो कल से आईसीयू में भर्ती करेंगे।

जबकि सीएमओ डा. बीएल यादव कह रहे हैं कि डेंगू से भयभीत होने की जरूरत नहीं। अभी चार मरीज हैं, सभी की हालत ठीक है। जिन प्राइवेट हास्पिटल में मरीजों के साथ डेंगू बताकर ठगी की जा रही है, उनके यहां कार्रवाई होगी। एसीएमओ के नेतृत्व में टीम बनाई है, जो हास्पिटलों में सर्वे कर स्थिति की पड़ताल करेगी।
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70 फीसदी मरीज वायरल से पीड़ित
एसएन के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. पीके माहेश्वरी ने बताया कि औसतन ओपीडी 500 मरीजों की है। लगभग 70 फीसदी मरीज वायरल फीवर के हैं।


प्राइवेट में रोजाना 30 से 50 जंबो पैक 
सिंगल डोनर प्लेटलेट्स, जिसे आम भाषा में जंबो पैक कहा जाता है, इससे 40-50 हजार प्लेटलेट्स बढ़ जाती हैं। रेंडम डोनर प्लेटलेट्स, जिसे मिनी पैक कहा जाता है, इससे 5-10 हजार तक प्लेटलेट्स बढ़ती हैं। प्राइवेट ब्लड बैंक में रोजाना 30-50 जंबो पैक की डिमांड है। प्रति जंबो पैक 7000 रुपये है।

और एसएन में एक भी नहीं
एसएन मेडिकल कालेज के डेंगू वार्ड में अभी 26 मरीज वायरल फीवर और तीन डेंगू एनएस-1(संभावित) के मरीज हैं। पांच डेंगू मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। डेंगू वार्ड प्रभारी डा. मृदुल चतुर्वेदी बताते हैं कि प्लेटलेट्स कम होना डेंगू की पुष्टि नहीं करता, न ही जंबो पैक चढ़ाने का कोई मानक निश्चित है। हमारे यहां एक भी मरीज को जंबो पैक, यहां तक कि मिनी पैक तक की जरूरत नहीं पड़ी।


सिंगल कमरा   : 2000 रुपये
आईसीयू      : 3500-5000 रुपये
नर्सिंग चार्ज   : 500 रुपये
डाक्टर विजिट: 500-1000 रुपये
जंबो पैक चढ़ाने: 1000-1500 रुपये
डेंगू लैब जांच    : 400-600 रुपये
मलेरिया जांच    :  150-250
( मरीजों से मिली जानकारी)

सरकारी अस्पताल में इलाज फ्री है, फिर भी मरीज वहां कम जाता है, ये सोचने वाली बात है, सुविधाओं के मुताबिक प्राइवेट हास्पिटल में चार्ज फिक्स है। जिन हास्पिटल में सुविधाओं के अभाव में ठगाई की जा रही है, इन पर कार्रवाई की जाए। डा. जेएन टंडन, आईएमए अध्यक्ष
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