भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए बदनाम हो चुके ब्रज के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर सिर्फ आस पास के जिलों से ही नहीं बल्कि हरियाणा और पंजाब तक से महिलाएं आ रही हैं। पहले यही हाल राजस्थान का था लेकिन वहां पीसीबीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (पीबीआई) की सख्ती के बाद बेटों की चाहत में बेटियों का अपनी कोख में ही कत्ल तक करा देने वाली महिलाओं ने ब्रज का रुख किया है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक यहां के प्रशासन ने भ्रूण लिंग परीक्षण को गंभीरता से नहीं लिया है।
राजस्थान में पीबीआई का गठन 17 सितंबर 2012 को हुआ था। शुरू में यह ठीक से काम नहीं कर रहा था। पिछले एक साल में सख्ती की है। इसने भ्रूण लिंग परीक्षण के 54 केस पकड़े हैं। इनमें नौ अंतर्राज्यीय हैं। इनमें एक हरियाणा, एक गुजरात, एक मध्य प्रदेश और चार यूपी के हैं।
यूपी के चारों मामले ब्रज के हैं। ये आगरा, मथुरा और फीरोजाबाद में पकड़े गए हैं। इन सेंटरों के तमाम रजिस्टर भी पीबीआई की टीम ले गई थी। इन्हें साक्ष्य के रूप में वहां की कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पीबीआई के सूत्रों ने बताया कि रजिस्टर देखकर पता चलता है कि पिछले एक साल में जब से राजस्थान में सख्ती हुई है, तभी से पंजाब , हरियाणा और दिल्ली तक के लोगों ने आगरा का रुख किया है।
पहले ऐसे लोग भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए राजस्थान आते थे। आगरा में पिछले दिनों गोकुलपुरा के डाक्टर अमित गुप्ता के सेंटर पर छापा मारा गया था। इसे सील कर दिया गया था। वहां के रिकार्ड में दिल्ली, हरियाणा तक की महिलाओं के नाम पते मिले। माना जा रहा है कि ये महिलाएं भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए ही आई होंगी। भला इतनी दूर से कोई महिला आगरा के एक मोहल्ले में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए क्यों आएगी। इसी तरह फतेहपुर सीकरी में डा. सलीम को पकड़ा गया। यहां भी दूर दराज की महिलाओं के नाम पते रजिस्टर में मिले।
आगरा के लोग मध्य प्रदेश जा रहे
आगरा। पीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि आगरा, मथुरा, फीरोजाबाद, मैनपुरी के लोग भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए महिलाओं को पहले राजस्थान के बीकानेर, जयपुर, भरतपुर ले जाते थे। लेकिन अब मध्य प्रदेश लेकर जा रहे हैं। इसकी जानकारी दलालों से मिली है। एमपी के सेंटरों पर भी कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।