सोशल मीडिया (व्हाट्स एप और फेसबुक) पर मंगलवार को समायोजित शिक्षामित्रों का मानदेय 17000 रुपये निर्धारित किए जाने का पत्र वायरल हुआ। इसे देख शिक्षामित्र परेशान हो गए हैं। संगठन के पदाधिकारियों से बात की, इसके बाद सच्चाई सामने आई।
‘प्राइमरी का मास्टर डाट काम’ की मुहर से शिक्षामित्रों के मानदेय के संबंध में बेसिक शिक्षा परिषद सचिव, इलाहाबाद संजय सिन्हा का पत्र वायरल हुआ। इसमें लिखा गया कि समायोजित शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय में तत्काल कार्यभार ग्रहण करना है और आख्या शासन को भेजनी है। उक्त मानदेय पर सात दिन के अंदर कोई कार्यभार ग्रहण नहीं करता तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
यह पत्र शिक्षामित्रों और शिक्षकों ने एक-दूसरे को भेजना शुरू कर दिया। कुछ देर में प्राइमरी का मास्टर डाट काम के संचालकों ने पत्र को फर्जी बताया और इसको शरारती तत्वों का काम बताया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छौंकर का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुए आदेश के संबंध में प्रांतीय नेतृत्व से बात की, आदेश को फर्जी बताया गया।
आदेश में जो स्थिति रखी गई है, यदि सरकार वैसा कोई निर्णय लेती है तो शिक्षामित्र उस पर तैयार नहीं होंगे। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) गिरजेश चौधरी का कहना है कि बेसिक शिक्षा परिषद सचिव की ओर से शिक्षामित्रों के मानदेय के संबंध में कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।