फर्जी मार्कशीट रैकेट में पुलिस की मांग पर डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन उन कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है, जो बीते सालों में हुए फर्जीवाड़ों के दौरान परीक्षा विभाग, गोपनीय विभाग, चार्ट रूम जैसे अन्य अहम विभागों में तैनात थे। इस रिपोर्ट को अगर पुलिस को सौंप दिया जाता है तो कम से कम तीन दर्जन कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर फर्जीवाडे़ की जांच में जुटी एसआईटी लंबे समय से डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन से यह रिकॉर्ड मांग रही थी, लेकिन टाला जाता रहा। 27 नवंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय एसआईटी को पूरा सहयोग करे। इसके बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई। हाईकोर्ट के निर्देश पर एसआईटी अब फर्जी मार्कशीट रैकेट समेत सभी मामलों की जांच भी कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को इसकी जानकारी भी दे दी गई है कि कब कौनसा कर्मचारी कहां ड्यूटी पर था। इस रिकॉर्ड की मदद से पुलिस को जांच में आसानी होगी और कर्मचारियों की संलिप्तता साफ हो सकेगी। विश्वविद्यालय के अधिकारी भी पुलिस और अदालत में कर्मचारियाें को दोषी बताकर खुद बच निकलने की कोशिश में हैं।
इस संबंध में कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल से पूछा गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि ऐसे कर्मचारियों की रिपोर्ट विश्वविद्यालय तैयार करा रहा है।