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रुपयों के लिए इतने बच्चों को जन्म से पहले ही मार देता था ये हैवान

Mon, 15 Jan 2018 06:04 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला आगरा
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आरोपी डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा मैक्स डायग्नोस्टिक एवं पैथोलॉजी के संचालक अजय उपाध्याय और प्रीति कुलश्रेष्ठ से राजस्थान की पीसीएनडीटी सेल की पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। 
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झोलाछाप हर महीने 100-120 महिलाओं का गर्भपात करवाता था। उसकी साथी प्रीति इसमें सहयोगी थी। ये दोनों गर्भवती महिलाओं को गर्भ गिराने की दवा देते थे। दवा से गर्भ नहीं गिरता तो उनकी अपने सेंटर पर ही सफाई करा दी जाती थी। 

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी 10 साल से इस धंधे में है। पहले वह एजेंट था, जो ग्राहकों को विभिन्न केंद्रों पर ले जाकर भ्रूण लिंग जांच करवाता था। इसमें मिलने वाले मोटे कमीशन को देख इसने बीते दो साल से खुद का सेंटर खोल लिया। 
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जुड़ गए दूसरे एजेंट

इसमें नर्स प्रीति को सहयोगी बना लिया। धीरे-धीरे इसके तार धौलपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, भिंड, करौली के एजेंटों से जुड़ गए। 

एजेंट सेंटर पर ग्राहक भेजते और दिन में तीन से पांच केस मिलने लगे। प्रति केस 20-40 हजार रुपए में तय होता था, इसमें एजेंट का कमीशन 20-30 फीसदी रहता था। 

राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल के प्रभारी नवीन जैन ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि एजेंट हर महीने 100 से अधिक गर्भपात कराता था। यह रैकेट राजस्थान-मध्य प्रदेश तक फैला है। कई अन्य के नाम भी सामने आए हैं। 

चौथी बार में पकड़ में आरोपी 

राजस्थान पीसीपीएनडीटी दल आरोपी को पकड़ने के लिए चार महीने से लगी हुई थी। धौलपुर में पकड़े गए गैंग ने इसका नाम लिया था। 

इसे पकड़ने के लिए टीम यहां तीन बार डमी मरीज भेज चुकी थी, लेकिन शातिर होने के कारण यह पकड़ में नहीं आ पाया। चौथी बार में इसे गिरफ्तार किया जा सका। 

आरोपी से पूछताछ में आठ सेंटरों के नाम आए हैं। ये सेंटर मथुरा और आगरा के हैं, इनमें पांच क्वालीफायड चिकित्सक के सेंटर बताए जा रहे हैं। 

एजेंट रहते हुए आरोपी इन सेंटरों पर ग्राहकों को भेजा करता था। टीम को इनके नाम और पता मिल गए हैं, जल्द इनको पकड़ने के लिए टीम अपना जाल बिछाएगी। 
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स्वास्थ्य विभाग सुस्त, नहीं होती जांच 

राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल भले ही आगरा में आकर भ्रूण लिंग जांच के गिरोह को पकड़ कर ले जा रही हो, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सुस्त है। 

आगरा में 310 अल्ट्रासाउंड सेंटर स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं, यहां अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच में औपचारिकता निभाई जाती। बिना लाइसेंस के चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों की पड़ताल के लिए भी कोई अभियान नहीं चलाया जाता। 

सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि सेंटरों की जांच कराई जाती है, बिना लाइसेंस के सेंटरों को बंद कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा। 
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