डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में बीएड फर्जी मार्कशीट की जांच में एक और नया खुलासा हुआ है। विशेष जांच दल (एसआईटी) को 2004-05 से 2012-13 सेशन तक फर्जीवाड़ा मिला है। संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची तैयार कर संबंधित कालेजों से उनका शैक्षणिक विवरण मांगा जा रहा है।
फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच लखनऊ एसआईटी कर रही है। पिछले महीने एसआईटी ने 2004 से 2012-13 तक के बीएड चार्ट जब्त किए थे। इसकी जांच में 80 निजी कालेजों में फर्जीवाड़े के साक्ष्य मिले हैं। इनमें जो विद्यार्थी अनुपस्थित रहे, उनके स्थान पर फर्जी अभ्यर्थियों की मार्कशीट जनरेट कर दी गई। चार्ट में भी पेज बदल दिए गए। एसआईटी ने कालेजों से संदिग्ध अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र, उपस्थिति रजिस्टर, पुस्तकालय कार्ड समेत उनके निवास प्रमाण पत्र भी मांगे हैं।
फोन कर पूछ रहे, अब क्या होगा...
2005 से अभी तक के सेशन की जांच होने पर कॉकस की अपने स्तर से मामले का पता करने में लगे हैं। सबसे ज्यादा डर फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी को है। वे कॉकस से फोन कर पूछ रहे हैं, ‘अब क्या होगा’।