गांव धौर्रा और नगला खरगा में आतिशबाजी बनाने का काम होता है। सात लाइसेंस हैं, जबकि काम करने वाले लगभग दो दर्जन से अधिक हैं। देसी बम भी बनाए जाते हैं। दर्जनभर से अधिक हादसे हो चुके हैं। इनमें कई दर्जन लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
वर्ष 2003 में एत्मादपुर थाने में जब्त की गई आतिशबाजी में विस्फोट हो गया था, इसमें एक बच्चे सहित दो की मौत हुई थी। 2004 में धौर्रा से देसी बम ले जा रहे स्कूटर में जवाहरपुल पर विस्फोट हुआ था। एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। नगला खरगा में गांव के बाहर बने पटाखे के गोदाम में विस्फोट से पांच लोगों की मौत हुई थी। गांव के भीतर आतिशबाजी बनानेे के दौरान विस्फोट से तीन लोगों की जान गई थी। टेंपो में कुबेरपुर के पास देसी बम में विस्फोट होने से दो लोगों की जान गई थी। नगला गोला में खेत पर बम बनाते समय विस्फोट से तीन लोगों की मौत हो गई थी। 2014 में गांव धौर्रा में महिला की विस्फोट में मौत हो गई थी।
कुतुकपुर और कमालपुर में नहीं मनी दिवाली
विस्फोट में मृत बिजेंद्र टेढ़ी बगिया में अपनी बहन नीरू देवी के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह पार्ट टाइम जॉब भी करता था। सामान खरीदने को गया था। उसकी मौत की खबर पहुंचने पर फीरोजाबाद के गांव कमालपुर में दिवाली नहीं मनाई गई। इसी तरह सुरेश के गांव कुतुकपुर में भी ग्रामीणों ने दिवाली नहीं मनाई। सुरेश दिल्ली में चूड़ी का काम करता था। त्योहार पर घर लौट रहा था। वहीं नगला हरकेशी के श्याम सिंह भी दिवाली पर सामान की खरीदारी करने रामबाग आ रहे थे। भागूपुर चौरहा से टाटा मैजिक में बैठे थे। श्याम के चार बच्चे हैं।
फोरेंसिक और बम डिस्पोजल टीम भी पहुंची
हाईवे पर मैजिक में विस्फोट की घटना की जांच के लिए फोरेंसिक टीम के साथ ही बम डिस्पोजल टीम भी मौके पर पहुंची। एसपीआरए बबीता साहू, सीओ जगवीर सिंह ने मौका मुआयना किया। पुलिस को फतेहाबाद के लाइसेंसधारी का परचा मिला है। पुलिस जांच कर रही है कि देसी बम कहां बने थे। लोगों ने बताया कि पेंसिल बम को पटकने से उस में विस्फोट हो जाता है। अनुमान है कि गाड़ी की छत पर रखे थैले में पेंसिल बम रहे होंगे।