लूटपाट बेडरूम में की गई, तो हत्या वहीं पर क्यों नहीं की गई? वहां किसी तरह के संघर्ष के निशान भी नहीं मिले हैं।
-सवाल 2
अवनीश ग्रोवर की कार घर के बाहर क्यों खड़ी मिली? जबकि चाबी अंदर टीवी पर रखी थी? कार की पार्किंग लाइट भी आन थी।
सवाल - 3
दोनों की हत्या गेट के पास की गई, तो दोनों के शव गैराज में क्यों बंद किए? दोनों के मुंह और पैर टेप के क्यों बांधे गए ?
अवनीश ग्रोवर और उनकी पत्नी ऊषा रानी की हत्या की गई मेन गेट के पास। दोनों के शव बंद मिले गैराज में। लूट की गई बेडरूम में। जबकि अवनीश ग्रोवर की सेंट्रो कार खड़ी थी घर के बाहर सड़क पर। उसकी पार्किंग लाइट भी ऑन थी। घटनाक्रम समझना आसान नहीं है। क्राइम सीन देखकर पुलिस उलझ गई। हर कोई यह सोचकर हैरान है कि जब हत्या गेट पर की गई, तो हत्यारों ने लाशें गैराज में क्यों बंद कीं? वो भी पैर और हाथों को टेप से बांधकर? कड़ियां जोड़ने के लिए अनुमान लगाया जा रहा है।
पुलिस का अनुमान है कि पहले दोनों के मुंह और पैर टेप से बंद किए गए होंगे। इसके बाद हत्या कर शव गैराज में बंद किए गए। लेकिन सवाल यह है कि पैर टेप से बंधे होने पर दोनों गेट तक कैसे पहुंच गए?। एक अनुमान यह भी है कि बदमाश पहले घर में प्रवेश कर चुके थे। अवनीश ग्रोवर बाद में आए। उनके आते ही बदमाशों ने उन पर वार किया। लेकिन यह कहानी इसलिए नहीं चल पा रही क्योंकि कार की चाबी अंदर टीवी पर रखी मिली। उन्होंने चप्पल भी घर के अंदर इस्तेमाल होने वाली पहन रखी थी। इसके अलावा कमरे के दरवाजे की लोहे की जाली कटी मिली है। इसे बदमाशों ने काटा। इससे लग रहा है कि दंपति अंदर थे।
सर्किल रेट 76 हजार, सुरक्षा इंतजाम नहीं
शहर की पॉश कालोनी खंदारी के जिस हनुमान चौहारा पर दंपति का बेरहमी से कत्ल किया गया है, वहां सर्किल रेट 76 हजार प्रति वर्ग वर्ग मीटर तक है। यह शहर की सबसे महंगी कॉलोनियों में से एक है। रजिस्ट्री पर शासन को बड़ा राजस्व मिलता है। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के इंतजाम शून्य है। रात को पुलिस गश्त तक नहीं करती है। यही वजह है कि बदमाश हत्या और लूटपाट कर बड़े आराम से चले गए।
अवनीश ग्रोवर की लगभग 500 वर्ग गज में बनी कोठी उस इलाके में है जहां दिन में ही नहीं, रात में भी चहल-पहल रहती है। उन्होंने यह कोठी 1977 में खरीदी थी। इससे पहले सूर्यनगर में अपने पैतृक मकान में भाइयों के साथ रहते थे।
हनुमान चौराहा पर इस कोठी में बाहर की तरफ पांच दुकानें बनी है। इससे सटा एक्सिस इमेजिंग सेंटर है। ठीक सामने दुकानें हैं। लोगों ने बताया कि पुलिस रात को गश्त नहीं करती है। इसके चलते यहां चोरी और डकैती की वारदात होती रहती हैं।
कब थमेगा अपराध ?
- खंदारी के ही जवाहनगर में आठ साल पहले सन्नी गुलाटी के माता पिता समेत तीन की बड़ी बेरहमी से हत्या की गई थी।
-। छह साल पहले वेदी प्लाइवुड वालों के घर तिहरा हत्याकांड हुआ था। इसमें नेपाली नौकर गिरफ्तार किया गया था।
-इसी साल जुलाई में अधिवक्ता प्रवीन गुलाटी की पत्नी रमा और बेटी दीक्षा की हत्या की गई। इसमें उनका भतीजा गिरफ्तार किया गया था।
100 नंबर पर फोन नहीं उठा
अवनीश ग्रोवर के मकान (नंबर 2/97) के गेट पर
ही खून पड़ा देखकर उनके दोस्तों ने सबसे पहले कंट्रोल रूम को 100 नंबर पर
फोन किया। उन्होंने बताया कि फोन रिसीव नहीं किया गया।
वर्दी में नहीं थी चौकी पुलिस
मृतक
के भाई जब खंदारी पुलिस चौकी पहुंचे तो वहां एक सिपाही को छोड़कर बाकी
पुलिसकर्मी वर्दी में नहीं थे। उस सिपाही को वे अपने साथ गाड़ी में ले आए।
बाकी पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर बाद में पहुंचे।