उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के चेयरमैन पद से बर्खास्त किए गए आगरा के कमला नगर निवासी अनिल यादव की हिस्ट्रीशीट फाड़े जाने का मामला रफा दफा करने में लगी पुलिस को झटका लगा है। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट 13 जनवरी को तलब कर ली है।
अनिल यादव की बर्खास्तगी में उनके संगीन गुनाहों का लंबा चिट्ठा भी प्रमुख वजह रहा था। उनके जुर्म की कुण्डली में डकैती, चौथ वसूली और बलवा जैसी धाराओं के अपराध दर्ज हैं। उच्च न्यायालय ने जब अनिल यादव का अपराधिक इतिहास मांगा, तो पुलिस ने इसे छुपा लिया था। इसके लिए न्यू आगरा थाना में उनकी हिस्ट्रीशीट से कई पन्ने फाड़ दिए गए थे।
पुलिस सूत्रों की मानें तो यह करतूत आगरा में तैनात रहे एक पीपीएस अफसर की थी। उसने एक बार अनिल यादव के घर पर प्रदर्शन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी कराया था। बाद में मीडिया में हिस्ट्रीशीट फाडे़ जाने का खुलासा होने पर शासन के निर्देश पर इसे नए सिरे से तैयार किया गया। तत्कालीन एसएसपी राजेश डी. मोड़क ने इस प्रकरण की जांच के आदेश दिए। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा।
लेकिन छह महीनों में न तो जांच शुरू हुई और न डीआईजी को रिपोर्ट भेजी गई। पिछले दिनों एक गुमनाम पत्र के सहारे हिस्ट्रीशीट फाड़े जाने के लिए एक सिपाही को लपेटने की तैयारी की गई थी, लेकिन यह कोशिश भी पूरी न हो सकी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 13 जनवरी को पुलिस अधिकारियों को जांच रिपोर्ट के साथ बुलाया है।