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अधिग्रहीत जमीन का कर दिया सौदा

Sat, 01 Apr 2017 12:53 AM IST
अधिग्रहीत जमीन का कर दिया सौदा
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स्टांप ड्यूटी
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आगरा विकास प्राधिकरण की ताजनगरी तृतीय चरण योजना के लिए अधिग्रहीत की गई करोड़ों की जमीन को ठिकाने लगाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जमीन के पूर्व स्वामी ने लेखपाल की मिलीभगत से फर्जी कागज तैयार कर इस अधिग्रहीत जमीन को फिर से बेचने की साजिश रच डाली। इस सरकारी जमीन को बेचने की अनुमति अपर जिलाधिकारी प्रशासन दी। बाद में विवाद का खुलासा होने पर उन्होंने साजिश रचने वाले लेखपाल तथा अन्य अधिकारियों पर बिना कोई कार्रवाई किए अपने ही आदेश को निरस्त कर दिया। जमीन की कीमत 40 करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही है। 
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मामला सदर तहसील के गांव लकावली में गाटा संख्या 273 की जमीन का है। इसका रकवा 0.516 हेक्टेयर 5160 वर्ग मीटर है। इस जमीन का एडीए पूर्व में ही अपनी ताजनगरी तृतीय चरण की योजना के लिए अधिग्रहण कर चुका है। इस जमीन के स्वामी जौहर प्रसाद को मुआवजा भी दिया जा चुका है। इसके बावजूद 19 दिसंबर 2016 को दूसरी जाति के बिल्डर विकास जैन को बेचने के लिए एडीएम प्रशासन के यहां धारा 157 के तहत आवेदन किया। इसके लिए क्रेता और विक्रेता ने संबंधित लेखपाल से मिलकर इसके फर्जी कागज तैयार करवाए। उक्त लेखपाल ने इसी साल 18 जनवरी को अपनी रिपोर्ट दी। इसमें उसने लिखा कि जमीन पर जौहर प्रसाद का कब्जा है और कृषि भूमि है। जबकि इस जमीन पर पिछले साल चार मार्च को भी धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज हो चुका था। इस तथ्य के साथ-साथ एडीए के अधिग्रहण को नजरअंदाज कर लेखपाल ने झूठी रिपोर्ट तैयार कर दी। इस रिपोर्ट के आधार पर छह फरवरी को एडीएम प्रशासन ने इस जमीन को बेचने का आदेश कर दिया। 
इसकी जानकारी जब पूर्व में इस जमीन को लेकर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करा चुके सतीश कुमार को हुई तो उन्होंने जमीन बेचने के आदेश वाले दिन ही एक और शिकायत दर्ज करा दी। इस शिकायत पर जब पड़ताल हुई तो पुरानी फाइलें खुलवाई गईं। इसमें पता चला कि उक्त जमीन एडीए अपनी योजना के लिए पूर्व में ही अधिग्रहीत कर चुका है। जांच मे पाया गया कि जमीन के बेचने के लिए फर्जी कागज तैयार कराए गए थे। चूंकि इस जमीन को बेचने की अनुमति एडीएम प्रशासन ने ही दी थी, इसलिए आनन-फानन में भूमि विक्रय के आदेश को निरस्त कर फाइल दबा दी गई। फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि एडीएम प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया कि जमीन को बेचने के लिए फर्जी कागज तैयार कराए गए थे।
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क्या है धारा 157
अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति दूसरी जाति के व्यक्ति को अपनी कृषि जमीन बेचना चाहता है तो इसके लिए पहले उसे एडीएम प्रशासन के यहां से धारा 157 के तहत अनुमति लेनी होगी। साथ ही क्रेता के पास 12.5 एकड़ से अधिक भूमि नहीं होनी चाहिए।
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यह बेहद गंभीर मामला है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव दयाल, डीएम
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