यूपी सहित पांच राज्यों में तलाशा जा रहा 50 हजार का इनामी बदमाश बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट नोएडा एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। शनिवार को उसे कागारौल से गिरफ्तार कर लिया। देवेंद्र पर 35 मुकदमे दर्ज हैं। कागारौल में 50 लाख की लूट में वह शामिल था। फतेहपुर सीकरी में अपने साथियों की हत्या करने के बाद वह फरार हो गया। किरावली क्षेत्र के कई व्यापारी उसके निशाने पर थे।
एसटीएफ पश्चिमी के अपर पुलिस अधीक्षक राजीव नरायन मिश्र ने पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि मथुरा के थाना मांट क्षेत्र स्थित गांव उदर निवासी देवेंद्र जाट पुत्र ओमकार शनिवार रात को बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। एसटीएफ की टीम ने किरावली से कागारौल जाने वाले रास्ते पर रात तकरीबन 11:30 बजे उसे गिरफ्तार कर लिया। एक तमंचा, दो कारतूस और एक अपाचे बरामद की गई। देवेंद्र ने यूपी के आगरा, मथुरा, हाथरस, फीरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर मेें लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली में भी वारदात कीं। उस पर विभिन्न थानों में 35 मुकदमे दर्ज हैं। वह 1997 में बरेली से सिपाही बना। फतेहाबाद में तैनाती के दौरान लूट में उसका नाम आया तो जेल जाना पड़ा। उसे निलंबित कर दिया गया। बाद में 2007 में उसे सोनभद्र से बर्खास्त किया गया। इसके बाद से वह अपना गैंग बनाकर वारदातें करने लगा। 28 दिसंबर 2015 को थाना कागारौल क्षेत्र में देवेंद्र और उसके साथियों ने पशु व्यापारियों से 50 लाख की लूट की थी। इस घटना में देवेंद्र के साथ दीपू (शमसाबाद रोड), नरेंद्र बप्पाड़ी, पिंटू, सौरभ (गजू, थाना मांट, मथुरा) और संतोष शामिल थे। मुखबिरी संतोष की मौसी के लड़के सोनू और दिन्नू (झज्जर, थाना राया, मथुरा) ने की थी। वारदात में इस्तेमाल इनोवा देवेंद्र के साथ नरेंद्र, दिन्नू, पिंटू ने आगरा-मथुरा रोड पर थाना रिफायनरी क्षेत्र से लूटी थी। पशु व्यापारियों से लूट के बाद सोनू और दिन्नू को मुखबिरी के लिए 14 लाख रुपया मिला। देवेंद्र पर डीजीपी की ओर से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
दो साथियों को ही मौत के घाट उतारा
पशु व्यापारियों से 50 लाख की लूट के रुपयों के बंटवारे को लेकर देवेंद्र की सोनू उर्फ सोमवीर और दिनेश उर्फ दिन्ने से अनबन हो गई। इसी के चलते छह मई 2016 को देवेंद्र ने सोनू और दिन्ने की गोली मारकर हत्या कर दी। दोनों बदमाशों पर भी इनाम घोषित था। दोनों के शव फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में नहर में फेंक दिए थे। पुलिस हत्या का खुलासा तक नहीं कर सकी थी।
यह दर्ज हैं मुकदमे
देवेंद्र पर आगरा में 13, मथुरा में नौ, हाथरस में सात, फीरोजाबाद में एक, गौतमबुद्ध नगर में एक, फरीदाबाद में एक, गुजरात, दिल्ली और मध्य प्रदेश में एक-एक मुकदमे में दर्ज है। इनमें धोखाधड़ी, जानलेवा हमला, हत्या, लूट, 25 आर्म्स एक्ट आदि मुकदमे शामिल हैं।
वाहन चोर से बन गया चांदी लुटेरा
आगरा। बर्खास्त सिपाही देवेंद्र जाट कुछ ही सालों में वाहन चोर से चांदी लुटेरा बन गया। आगरा और फीरोजाबाद में चांदी लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। वारदात से पहले सटीक मुखबिरी होने के कारण किसी के हाथ नहीं आता था। पुलिस के नेटवर्क की जानकारी होने का फायदा उठाता था। वारदात के समय कभी मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता। इसके साथ ही सिम कुछ ही दिन में नई खरीद लेता था। एक जिले से दूसरे जिले में जाकर ठिकाना बना लेता था। एक बार वारदात के बाद कई महीने में दूसरी वारदात के लिए बाहर निकलता था।
एसटीएफ के मुताबिक, देवेंद्र दसवीं पास है। 1997 में सिपाही बनने के बाद उसकी पहली पोस्टिंग अंबेडकर नगर में हुई। इसके बाद वर्ष 1998 में वह थाना फतेहाबाद में तैनात था। पैसा कमाने की चाहत में उसने वर्ष 2000 में थाना मुरसान, मथुरा में एक व्यापारी से तीन लाख रुपये की लूट की। व्यापारी के मुनीम दलवीर जाट ने मुखबिरी की थी। देवेंद्र को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा था और उसे निलंबित कर दिया गया। आठ महीने जेल में रहने के बाद बाहर आया तो फतेहाबाद के विपिन से संपर्क किया। विपिन वाहन चोरी करके कलकत्ता में बेचता था। देवेंद्र भी उसके साथ शामिल हो गया।
वर्ष 2003 में ही अपने साथी विपिन, कापसहेडा, दिल्ली निवासी हरजीत और काके के साथ मिलकर फरह क्षेत्र में ट्रक लूटा। पुलिस से बचने के लिए दिल्ली में ठिकाना बनाया। दिल्ली पुलिस ने देवेंद्र, हरजीत और काके को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इसके बाद मथुरा की जेल से छूटा। मथुरा जेल में देवेंद्र की मुलाकात हरकेश (बिसावर, सादाबाद, हाथरस), धर्मेंद्र (लोेकनगला, दाऊजी, मथुरा), डब्बू पंडित (थाना दाऊजी, मथुरा) और हरिओम (मथुरा) से हुई। देवेंद्र ने हरकेश, धर्मेंद्र और डब्बू के साथ मिलकर चांदी लुटेरों का गैंग बना लिया। इसके बाद उसने वर्ष 2008 और 2009 में गैंग के साथ दस से अधिक वारदात कीं। 2008 में फीरोजाबाद के थाना सिरसागंज में बनारस जा रही 550 किलोग्राम चांदी लूटी। इन्हीं गतिविधियों के कारण देवेंद्र को पुलिस विभाग से सोनभद्र में बर्खास्त कर दिया। देवेंद्र ने मथुरा में सुनार से 350 ग्राम सोना, 2009 में हरीपर्वत में व्यापारी से 50 किलोग्राम चांदी, 2011 में मध्य प्रदेश के शिवपुरी में चीनी से भरा ट्रक लूटकर चालक और क्लीनर की हत्या कर दी। 2014 में थाना सिकंदराराऊ एरिया में 44 लाख रुपये, मसाला व्यापारी से 11 लाख, कागारौल में पशु व्यापारी से 50 लाख लूटे। गैंग वारदात से पहले सटीक मुखबिरी करता है। मुखबिर कोई और नहीं, बल्कि व्यापारी के खास परिचित और कर्मचारी ही होते हैं। देवेंद्र उन्हें रुपयों का लालच देकर वारदात करता है।
जेल में ही बना लेता था गैंग
देवेंद्र जितनी बार जेल में गया, वहां उसने अपना गैंग बना लिया। वह लूट की वारदातों में जेल में बंद अभियुक्तों से दोस्ती करता था। इसके बाद उनसे जेल से छूटने पर संपर्क करता था। वारदात में उन्हीं लोगों को शामिल करता था।
मध्य प्रदेश में घोषित हुआ 3.5 हजार का इनाम
2011 में मध्य प्रदेश में ट्रक लूटने के बाद उसका साथी डबुआ ट्रक को बेचने जा रहा था। वह शिवपुरी में पकड़ा गया। तब देवेंद्र का नाम इस वारदात में सामने आया। इस पर मध्य प्रदेश में उस पर 3.5 हजार का इनाम घोषित हुआ।
एक सिपाही भी बन गया साथी
वर्ष 2012 में न्यू आगरा पुलिस ने देवेंद्र को पकड़ा। 2014 में जेल से छूटा। तब देवेंद्र की मुलाकात सिपाही विनोद से हुई। विनोद भी एक लूट के मामले में जेल में बंद था। उसे पुलिस से बर्खास्त कर दिया गया था।
महाराष्ट्र में भी की वारदात
देवेंद्र जाट अपने साथी दीपू, संतोष, सौरभ के साथ मथुरा में छिपे हुए थे। बाद में दीपू के दोस्त पंकज के साथ महाराष्ट्र के धूलिया में चले गए। पंकज पशु व्यापारी था। भैंसों को वहां ले जाकर बेचता था। इस दौरान देवेंद्र के गैंग ने एक पशु व्यापारी से 50 लाख की लूट की। बाद में वहां से भागकर मथुरा आ गए। यहां पर गुटका व्यापारी से सात लाख लूटे।
व्यापारी ने छोड़ा था आगरा
हरीपर्वत क्षेत्र के व्यापारी से 2009 में देवेंद्र ने चांदी लूट की थी। गैंग ने पहले व्यापारी के परिवार को घर में बंधक बनाया। इसके बाद उसकी दुकान पर जाकर बंधक बनाने की जानकारी दी। उसकी दुकान से 50 लाख लूटकर ले गया। डर के कारण व्यापारी ने कुछ नहीं किया। बाद में व्यापारी के पुत्र को भी उठाने का प्रयास किया था। डर के कारण व्यापारी का परिवार आगरा छोड़कर गुजरात में बस गया।