डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से 2004 में बीएड करने वाले 2700 सहायक अध्यापकों की नौकरी खतरे में है। दरअसल, यूनिवर्सिटी के मार्कशीट फर्जीवाड़े की जांच कर रही एसआईटी ने 2004 सत्र की सभी मार्कशीट निरस्त कराने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं। जांच में इस सत्र की 8,000 में से 5,332 मार्कशीट फर्जी पाई गई थीं। जांच एजेंसी ने सत्र का पूरा रिजल्ट निरस्त कराने के लिए राजभवन के साथ यूनिवर्सिटी को भी संस्तुति भेजी। अब इसका रिमाइंडर भेजा गया है।
साथ ही इस जांच रिपोर्ट को हाईकोर्ट के सामने रखने की शासन से अनुमति मांगी है। अगर यूनिवर्सिटी और राजभव ने एक्शन नहीं लिया तो उच्च न्यायालय के सामने मामला रखा जाएगा। इस मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में ही हो रही है।
अगर शासन से जल्द अनुमति मिल जाती है तो नौ अगस्त को रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी जा सकती है।
इसकी तारीख पहले से लगी है। अगर अनुमति में देर होती है तो रिपोर्ट बाद में रखी जाएगी। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन 8,000 में से 2,700 डिग्री उन लोगों की हैं जो प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। इन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। इनमें ज्यादातर आगरा, कानपुर, झांसी और अलीगढ़ मंडल के बताए गए हैं। इनके रोल नंबर के जरिए इनके नाम और तैनाती स्थल का रिकार्ड एसआईटी नेे पहले ही जुटा रखा था। अब सिर्फ रिजल्ट निरस्त होने का इंतजार है। इसके बाद पहले इन्हें बर्खास्त कराया जाएगा। फिर इन पर एफआईआर भी हो सकती है। इन्हें नौकरी भी इसलिए आसानी से मिल गई थी क्योंकि बीएड में बंपर नंबर मिले थे।
फरार लिपिकों की गिरफ्तारी की तैयारी
इसी केस में तीन लिपिक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इतने ही फरार चल रहे हैं। एसआईटी दो-तीन दिन के भीतर ही इनके घर दबिश देने की तैयारी कर चुकी है। इनके वारंट पहले ही जारी हैं। इसके बाद विवि. अफसरों की बारी आएगी। बता दें, अभी सत्र 2004 की जांच पूरी हुई है। एसआईटी 2004 से 2009 तक के सभी सत्रों की जांच कर रही है।