जैतपुर के मढ़ेपुरा गांव में बुधवार की सुबह डायरिया से एक बच्ची की मौत और 150 लोगों के बीमार होने से हड़कंप मच गया। सूचना पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच गई। देरशाम तक टीम घर-घर जाकर बीमार लोगों का इलाज कर रही थी। डाक्टरों ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
गांव मढे़पुरा में सूबेदार की पुत्री मधू (5) को उल्टी और दस्त की शिकायत थी। बुधवार सुबह उसकी मौत हो गई। आठ साल के प्रमोद, चार साल की कृष्णा की हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें सीएचसी बाह ले गये। गीता (5), कामिनी (8), सुमन (11), मीना (6), रवि (5), मोहन (7) समेत कई बच्चों को की तबियत खराब होने पर सरकारी अस्पताल और निजी डाक्टरों के पास ले जाया गया। कुछ को आगरा भी भेजा गया। मामले की जानकारी होते ही एसीएमओ वीरेंद्र भारती, तहसीलदार इंद्र नंदन सिंह, सीएचसी अधीक्षक बाह डॉ. धीरेन्द्र कुमार, जैतपुर के अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार की टीम एंबुलेंस के साथ मढ़ेपुरा पहुुंच गये। पहले शिविर लगाकर बीमारों का परीक्षण और उपचार किया गया। बाद में घर-घर जाकर जांच और उपचार का क्रम देरशाम तक चला। बीमारों में ज्यादातर तीन से 12 साल तक के बच्चे शामिल हैं। अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि अब स्थिति नियंत्रण में है। अब तक 150 बीमारों का इलाज किया गया है। इनमें सभी उम्र के लोग शामिल हैं। डायरिया, बुखार, खुजली और जुकाम के मरीज देखे गए।
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गंदगी बनीं बीमारी का कारण
बाह। मढ़ेपुरा में बच्चों के बीमार होने का कारण मुख्य रूप से गंदगी को माना जा रहा है। गांव में उपस्वास्थ्य केन्द्र बदहाल पड़ा है। ग्रामीण स्वच्छता अभियान के लिए प्रधान और एएनएम के खाते में सफाई और जनजागरण के लिए आने वाली धनराशि का इस्तेमाल किया जाता तो गंदगी नहीं रहती। उपस्वास्थ्य केन्द्र के पास भरे गंदे पानी में पनपते मच्छर और मक्खियां बीमारी की वजह बन रही हैं। गलियों में कहीं कीचड़ भरा है तो कहीं पानी भरा है। अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि गंदगी और गर्मी के असर से लोग बीमार हुए हैं। ग्रामप्रधान और एएनएम को ग्रामीण स्वच्छता मिशन के धन से साफ-सफाई के लिए कहा गया है।
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भोपेपुरा में पांच भैंस मरीं, 12 बीमार
बाह। जैतपुर के भोपेपुरा गांव में पांच दुधारू भैंसें मर गईं। जबकि 12 बीमार हैं। सूूचना पर पहुंची पशुपालन विभाग की टीम ने बीमार पशुओं का इलाज किया। इनके बीमार होने का कारण फिलहाल पता नहीं चल सका है लेकिन डॉक्टर गर्मी के कारण विषैले हुए चारे को खाना मान रहे हैं। मरी भैंसों का पोस्टमार्टम कराया गया है। मंगलवार शाम भोपेपुरा निवासी नरायन सिंह और रामबाबू की पांच भैंस चारा खाने के चंद घंटों बाद ही मर गईं। जबकि 12 भैंस बीमार हो गई। जैतपुर के डाक्टर बीके पाठक ने बताया कि पेस्टी साइड के इस्तेमाल से मौत होने की आशंका लग रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। उन्होंने पशुपालकों को चारा, भूसा आदि पानी में भिगोने के बाद पशुओं को खिलाने की सलाह दी है।