साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल और कंप्यूटर डेटा में सेंध लगाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इन दिनों मोबाइल को हैक करने के लिए लिंक फारवर्ड करके और कॉल करके धोखाधड़ी की जा रही है। एनी डेस्क मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड कराकर हैकर्स न सिर्फ डेटा चोरी कर रहे हैं, बल्कि रकम भी ट्रांसफर कर रहे हैं।
आगरा में साइबर सेल के पास हाल ही में एक मामला आया। इसमें मोबाइल धारक को फोन करके एप डाउनलोड करने के लिए बोला गया। इसके बाद नौ नंबर का कोड पूछ लिया गया। इसके बाद पेमेंट एप से दो बार में 14 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन कर लिया गया। इससे दो बुकिंग की गई थीं।
मगर, मोबाइल धारक को शक हो गया। उन्होंने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। इसके बाद एप को हटा दिया। साइबर क्राइम सेल में शिकायत की। सेल ने रकम वापस करा दी। पुलिस के मुताबिक, एनी डेस्क मोबाइल एप्लीकेशन प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध है। हाल में यह सोशल मीडिया से फारवर्ड होकर आता है। इस लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए।
ऐसे करते है धोखाधड़ी
इस एप की मदद से यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) प्लेटफार्म पर धोखाधड़ी की जा सकती है। कोड को जान लेते हैं। इस एप की मदद से मोबाइल को हैकर्स नियंत्रित कर सकते हैं। एप के डाउनलोड होने के बाद नौ अंकों का कोड जेनरेट होता है। इसको हैकर्स किसी न किसी माध्यम से पता कर लेते हैं।
रिजर्व बैंक के साइबर सिक्योरिटी एवं आईटी एग्जामिनेशन सेल की ओर से जारी अलर्ट में कहा गया है कि इस एप को इंस्टाल करने के बाद अन्य एप की तरह ही ग्राहकों से फोन को नियंत्रित करने की अनुमति मांगी जाती है। अनुमति मिलने के बाद यह एप फोन में मौजूद अन्य पेमेंट एप से ट्रांजेक्शन के लिए निजी सूचनाएं चुरा लेता है।
हैकर्स चला सकता है मोबाइल
साइबर क्राइम सेल के एक्सपर्ट विजय तोमर ने बताया कि मोबाइल फोन आपका होगा, लेकिन इस एप की मदद से हैकर्स चलाएंगे। वह फोन की जानकारी को न सिर्फ कापी कर लेगा, बल्कि डिलीट भी कर देगा।
यह एप प्ले स्टोर पर भी मिल जाता है। इसके अलावा भी एक और एप है, जिसकी मदद हैकर्स ले रहे हैं। इसके लिए आरबीआई ने चेतावनी जारी की है। कंप्यूटर को भी इस एप की मदद से रिमोटली प्रयोग में लाया जा सकता है।