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भाजपा सांसद का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाया, फिर लोगों से मांगे 25-25 हजार रुपये

Tue, 06 Oct 2020 12:56 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

  • साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया पर ठगी का जाल बिछा रखा है। रिश्तेदार-परिचित के नाम से ही नहीं जनप्रतिनिधियों के नाम से भी लोगों से रकम मांगी जा रही है। आगरा में ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसमें भाजपा सांसद राजकुमार चाहर के नाम से फर्जी फेसबुक आईडी से एक व्यक्ति से मदद के नाम पर रकम मांगी गई।  
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सांसद चाहर के नाम से मांगी गई रकम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर का फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों को संदेश भेजकर रकम मांगी जा रही है। एक-एक से 25 हजार रुपये तक मांगे गए हैं। संदेश में लिखा है कि बीमारी के उपचार के लिए रकम भेजिए। इसकी जानकारी सांसद के पास भी पहुंची है। उनका कहना है कि वह मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई कराएंगे।
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फर्जी अकाउंट पर सांसद का वही फोटो लगा है जो असली पर लगा है। हालांकि फोटो के नीचे लिखा है लिव्स इन अहमदाबाद यानी अहमदाबाद में रहते हैं। एक महीना पहले सांसद को बुखार आया था। तब वह दिल्ली में थे। माना जा रहा है कि फर्जी एकाउंट उसी समय बनाया गया है। फेसबुक मैसेंजर के जरिए भेजे गए संदेशों में बीमारी के उपचार के लिए पैसे की मांग की गई है।

'25,000 रुपये चाहिए... थोड़ा जल्दी भेजना'
फर्जी एकाउंट से मैसेंजर के जरिए भेजे गए संदेश
संदेश : हेलो !
जवाब : बोलिए..
संदेश : कहां पर हो ?
जवाब : क्या हुआ... घर पर हूं।
संदेश : एक छोटा सा काम है। 
जवाब : बोलिए।
संदेश : कुछ पैसे चाहिए।
जवाब : कितने।
संदेश : 25000।
जवाब : कैसे दे पाऊंगा.. आपका गूगल पे एकाउंट क्या है।
संदेश : 9090.... (खाते का पूरा नंबर है)।
जवाब : 30 मिनट में करता हूं।
संदेश : थोड़ा जल्दी करना।
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झांसे में न आएं लोग : सांसद

सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि मुझे भी जानकारी मिली है। लोग झांसे में न आएं। मेरा एक ही फेसबुक एकाउंट है। इसकी साइबर सुरक्षा के उपाय भी किए गए हैं। किसी ने फर्जी एकाउंट बनाया है। एसएसपी से शिकायत कर मुकदमा दर्ज कराऊंगा। 

यह फिशिंग है.. सावधान रहें

साइबर एक्सपर्ट दाशि शर्मा ने बताया कि यह एक नए प्रकार की फिशिंग है जिसमे साइबर अपराधी  प्रभावशाली व्यक्ति का उसके असली फेसबुक अकाउंट से प्रोफाइल और कवर फोटो डाउनलोड करके उसी तरह की दूसरी प्रोफाइल तैयार कर लेता है। इसके माध्यम से लोगों को फंसाया जाता है। व्यक्ति उसे असली फेसबुक अकाउंट समझ कर अपनी मित्रता सूची में शामिल कर लेता है। उसके बाद साइबर अपराधी आईडी में जुड़े सभी लोगों को बारी-बारी से पर्सनल मैसेज कर ठगी की कोशिश करता है।
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