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साइबर अपराध: सस्ती बाइक के लालच में फंसा बी फार्मा का छात्र, साइबर सेल ने दिए बचने के सुझाव

Wed, 30 Dec 2020 11:37 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • पीड़ित ने पुलिस से की शिकायत
  • साइबर सेल को जांच के आदेश
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फेसबुक पर बाइक का विज्ञापन देकर साइबर अपराधियों ने बी फार्मा के छात्र को जाल में फंसा लिया। उससे खाते में 1.13 लाख रुपये जमा करा लिए। इसके बावजूद भी रकम की मांग करने पर छात्र को शक हो गया। उसने मंगलवार को पुलिस से शिकायत की। थाना पुलिस ने साइबर सेल को जांच के आदेश किए हैं।
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थाना जगदीशपुरा के गांव मघटई निवासी मोहित बी फार्मा का छात्र है। 26 दिसंबर को मोहित ने फेसबुक पर बाइक का विज्ञापन देखा। बाइक पर कानपुर का नंबर था। इसकी कीमत 83 हजार रुपये रखी थी। मोहित ने विज्ञापन में दिए नंबर पर कॉल किया। मोहित के मुताबिक, विज्ञापन देने वाले ने अपना नाम ऋषि कुमार बताया। कहा कि वो फौज में है। इस समय जयपुर में तैनात है। अब दूसरी जगह तैनाती मिल गई है। वहां बाइक चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बाइक की कीमत तकरीबन 1.75 लाख रुपये है। मगर, वो बाइक 83 हजार रुपये में बेच रहा है। उन्होंने अपने फोटो भी भेजे, जोकि वर्दी में थे। आधार कार्ड भी भेज दिया।

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पहले 25 हजार रुपये की मांग की। इस पर मोहित ने रकम जमा कर दी। बाद में ट्रांसपोर्ट खर्च से लेकर अन्य खर्च बताकर और रुपये जमा करा लिए। फिर बाइक की कीमत से अधिक रकम मांगी गई। मोहित के मना करने पर कहा कि वह बाइक पहुंचने पर खाते में रकम ट्रांसफर कर देगा। इस पर कुल 1.13 लाख रुपये जमा करा लिए। मंगलवार को व्हाटसएप पर ट्रक की बिल्टी भेजकर भरतपुर तक बाइक आने की बात कही। इसके बाद 7100 रुपये और मांगे। मोहित को शक हो गया, उन्होंने मना कर दिया। कहा कि रकम तभी देंगे जब, बाइक आ जाएगी। इस पर साइबर अपराधी ने कहा कि बाइक को ट्रांसपोर्ट कंपनी अलवर ले गई है। अब रुपये जमा करने पर ही आएगी। ठगी की आशंका पर मोहित ने पुलिस से शिकायत की। थाना जगदीशपुरा पुलिस ने मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी है।
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सोशल मीडिया के विज्ञापन पर नहीं करें विश्वास
रेंज साइबर सेल के एक्सपर्ट निरीक्षक शैलेष सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर आने वाले इस तरह के खरीद-फरोख्त से संबंधित विज्ञापन से सावधान रहें। साइबर अपराधी फर्जी विज्ञापन देकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। फोटो किसी और का होता है, आधार कार्ड किसी और का? इसलिए फोटो और आधार कार्ड के आधार पर विश्वास नहीं करना चाहिए। विज्ञापन की सत्यता के बारे में पता करना चाहिए। कोई सामान भेजने से पहले रुपये की मांग करता है तो समझ जाएं कि ठगी कर सकता है। नौकरी का विज्ञापन देकर रुपयों की मांग करने वालों से भी सावधान रहें। कई बार पुलिस गैंग को पकड़कर जेल भेज चुकी है।
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