जो रिश्वत नहीं देता था उसकी गाड़ियों को कई-कई दिनों तक खड़ा रखता है। वो गाड़ियों के लोडेड सामान को नहीं उतरवाता था। इसके कारण सामान लेकर आए कंपनी के ड्राइवर और अन्य कर्मचारी डिपो में परेशान होते थे।
इसकी जानकारी संबंधित निजी कंपनियों के सीनियर अधिकारियों व मैनेजर को दी जाती थी। इसके बाद डिपो में रिश्वत का खेल शुरू होता था। चालक जाकर एरिया मैनेजर से सेटिंग करता था और सामान को जल्दी उतरवाने की मांग करता था।
इसके बदले में मैनेजर योगेश्वर चालकों और निजी कंपनियों के मालिकों से रुपयों की मांग करता था। कहता था कि वो उनका सामान गाड़ी पहुंचने के कुछ घंटे बाद ही उतरवा देगा। इसकी जानकारी मिलने के बाद सीबीआई कई दिनों से योगेश्वर को ट्रैस कर रही थी।
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शनिवार को योगेश्वर ने एक व्यक्ति से पांच हजार रुपये की रिश्वत बतौर गाड़ी से सामान उतरवाने के लिए मांगी थी, जो कि सीएसडी डिपो में पहुंचा था। इसी दौरान सीबीआई ने उस व्यक्ति को पांच हजार रुपये की रिश्वत देकर योगेश्वर के पास भेजा।
जैसे ही योगेश्वर ने रिश्वत की धनराशि पकड़ी तो सीबीआई की टीम ने उसे नोटों के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई की टीम आरोपी योगेश्वर को रविवार को रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश करेगी।
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