सोशल साइट्स के गलत इस्तेमाल से लेकर नेट बैंकिंग में धोखाधड़ी तक के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर अपराध के लैब परीक्षण की व्यवस्था भी कर दी गई है। आगरा फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (एफएसएल) में ही जल्द ही साइबर क्राइम लैब की स्थापना होने जा रही है। शासन ने इसके लिए एक करोड़ के उपकरण भेज दिए हैं। एफएसएल के वैज्ञानिक साइबर क्राइम डिटेक्शन की स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चेन्नई जाएंगे। आगरा के साथ ही लखनऊ और वाराणसी एफएसएल में भी साइबर क्राइम लैब खोली जा रही हैं।
केंद्र सरकार की योजना प्रत्येक पुलिस रेंज में कम से कम एक एफएसएल खोलने के अलावा पहले से चल रही विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (आगरा, लखनऊ और वाराणसी) में नए सेक्शन शुरू करने की है। इसी के तहत पहले डीएनए लैब खोले जाने पर जोर दिया गया। अब साइबर क्राइम लैब स्थापित की जा रही हैं। इनके अलावा मेरठ में सोशल मीडिया रिसर्च एंड कमांड सेंटर खोला जा रहा है। इसका काम लगभग फाइनल हो चुका है। इसमें सोशल मीडिया पर नजर रखी जाएगी, जबकि तीनों साइबर क्राइम लैब में साइबर क्राइम का वैज्ञानिक विश्लेषण पर साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
इसका इस्तेमाल साइबर अपराधियों को सजा दिलाने में होगा। पुलिस की पहली साइबर सेल भी आगरा में ही खुली थी। एफएसएल के संयुक्त निदेशक डाक्टर अतुल कुमार मित्तल को साइबर क्राइम लैब खोले जाने संबंधी शासन का आदेश प्राप्त हो गया है। वैज्ञानिकों को चेन्नई की साइबर लैब में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद लैब शुरू कर दी जाएगी।
28 जिलों की पुलिस को फायदा
साइबर क्राइम के मसले सुलझाने से लेकर साक्ष्य जुटाने तक में 28 जिलों की पुलिस को फायदा मिलेगा। ये सभी आगरा एफएसएल के दायरे में आते हैं। आगरा के अलावा अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, झांसी मंडल में शामिल जनपद हैं।
सहारनपुर में लैब के लिए जमीन मिली
आगरा। सहारनपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला खोले जाने के लिए जमीन मिल गई है। यहां सी श्रेणी की लैब खोली जाएगी। इसके लिए वहां के जिला प्रशासन ने अंबाला रोड स्थित मेडिकल कॉलेज के पास में जमीन चिन्हित की है। इसके मुआयने के लिए 22 जुलाई को लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक डाक्टर श्याम बिहारी मिश्रा सहारनपुर जाएंगे।