उद्योगपति संजीव गुप्ता की पानीपत से बरामदगी के बाद माना जा रहा था कि शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुलिस पूरी कहानी से पर्दा उठाएगी, लेकिन उसने जांच चलने की बात कहकर पूरे मामले को और उलझा दिया।
22 जुलाई को आर्चिट ग्रीन निवासी उद्योगपति संजीव गुप्ता सागर रत्ना रेस्टोरेंट से लापता हुए थे। 28 जुलाई को बडे़ ही नाटकीय अंदाज में पुलिस ने उनको पानीपत के होटल स्वर्ण महल से बरामद कर लिया।
रात ढाई बजे पुलिस उन्हें लेकर पुलिस लाइन पहुंची। शनिवार दोपहर 12 बजे पुलिस लाइन में प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि पुलिस पूरे मामले को फर्जी बताते हुए संजीव को जेल भेज देगी, लेकिन एसएसपी अजय कुमार ने यह कहते हुए पूरे मामले को घुमा दिया संजीव को दो मिनट के लिए मीडिया के सामने लाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
हालांकि सामने आते ही मीडिया ने संजीव गुप्ता पर सवालों की बौछार कर दी। संजीव गुप्ता सवालों की बौछार पर रोने लगा...। बोला क्या मैं ऐसा हूं... मैं क्यों करूंगा ड्रामा...। संजीव एसएसपी का गुणगान करने लगे। सवालों में उसे घिरता देख एसएसपी ने क्राइम ब्रांच की टीम को इशारा किया तो क्राइम ब्रांच की टीम एक पल गंवाए बिना संजीव को पत्रकारों के सामने से दूर ले गयी।
एसएसपी अजय कुमार ने बताया कि प्रथमदृष्टया अपहरण की स्थिति संदिग्ध है। सात दिन में पुलिस इस मामले में पूरी जांच कर लेगी कि संजीव गुप्ता का अपहरण हुआ था या फिर वह खुद चले गए थे। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रकम घर से मांगने के लिए दूसरा नंबर बात करने के लिए दिया था।
इस केस में कोई फिरौती नहीं हुई है, लेकिन संदेह यह कि फिरौती मांगने वाले पकड़ को इतनी देर के लिए नहीं छोड़ेंगे कि भागने का मौका मिल जाए। बहुत कुछ जांच के लिए शेष है। सात दिन में तस्वीर सामने होगी। इसकी जांच एसपी सिटी को सौंपी गई है।