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बिल्डर ही नहीं, अफसरों की भी अटकी सांसें

Sun, 19 Jul 2015 02:01 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला आगरा।
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यमुना के डूब क्षेत्र में निर्माणों की स्थिति को लेकर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को 28 जुलाई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में जवाब दाखिल करना है। इससे बिल्डर ही नहीं, तमाम उन विभागों के अधिकारियों की भी धड़कन बढ़ गई है, जिनको दम तोड़ती यमुना के संबंध में ट्रिब्यूनल को जवाब देना है। हालात यह हैं कि निर्माणों का चिह्नांकन तक नहीं हो सका है। वहीं यमुना में गिरने वाले नालों को भी रोका नहीं जा सका है।
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बता दें, पर्यावरणविद डीके जोशी ने एनजीटी में यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी। इस पर ट्रिब्यूनल अग्रिम निर्देश तक यमुना किनारे निर्माणों के साथ-साथ इनके क्रय-विक्रय पर भी रोक लगा दी थी। साथ ही सिंचाई विभाग को जलनिगम के साथ नदी के डूब क्षेत्र का पुन: निर्धारण करने करने का निर्देश दिया था। इस सर्वे के आधार पर ही एडीए को डूब क्षेत्र में निर्माणों को चिह्नित करना है। सभी विभागों को संयुक्त रूप से जवाब तैयार कर 28 जुलाई को ट्रिब्यूनल में दाखिल करना है। एनजीटी के रुख को देखते हुए बिल्डरों की सांसें अटकी हुई हैं। क्योंकि अब तक वह करोड़ों रुपये का इनवेस्ट कर चुके हैं। इधर, एडीए ने सिंचाई विभाग के सर्वे के आधार पर डूब क्षेत्र में हुए निर्माणों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। मगर, अब तक यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है और न ही यमुना में सीधे गिरने वाले नालों की रोकथाम का ही कोई रास्ता निकाल सके हैं। सिंचाई विभाग के सर्वे पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में इन सभी विभागों के अधिकारियों की धड़कन बढ़ी हुई है।
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