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बैंक अफसर तक पहुंचेगी 80 लाख की ठगी की जांच

Tue, 20 Dec 2016 01:03 AM IST
बैंक अफसर तक पहुंचेगी 80 लाख की ठगी की जांच
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2000 rupees
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आगरा ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाहियों ने नोएडा के कारोबारी से जो 80 लाख की ठगी की है, इसकी जांच की आंच कानपुर के एक बड़े बैंक के अधिकारी तक पहुंच सकती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कारोबारी सेटिंग के तहत कानपुर में रकम जमा कराने जा रहा था। उसका उस बैंक में खाता भी नहीं है। पुलिस इस पूरे मामले की जानकारी आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय को भी देगी।
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पुलिस सूत्रों की मानें तो यह खेल नोट बदलने का हो सकता है। कारोबारी ने सिपाहियों से जैसे ही 80 लाख की रकम के बारे में कागजात दिखाने के लिए कहा, तो उसके होश उड़ गए। माना जा रहा है कि वह रकम कालाधन रही होगी।
तभी उसने इतनी आसानी से 80 लाख दे दिए और इसकी कहीं शिकायत भी तुरंत नहीं की। जब उसे पता चला कि उस पर कोई छापा नहीं था, तब उसे शिकायत की याद आई। इसके बाद भी रिपोर्ट दर्ज न कराना तमाम सवाल खड़े कर रहा है। या तो सिपाहियों ने उसे भयभीत कर दिया है या फिर अघोषित आय होने के चलते उसने जुबां पर ताला लगा लिया है।
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अब देखना यह है कि इस मामले में पुलिस आयकर और प्रवर्तन निदेशालय को रिपोर्ट कितने दिन में देती है और उनकी जांच कब शुरू होती है। सवाल यह भी है कि  सिपाहियों से वापस मिले 60 लाख का व्यापारी ने क्या किया।

सिपाहियों ने कैसे जमा कराए 20 लाख रुपये
आगरा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सिपाहियों ने 80 लाख में से 60 लाख वापस कर दिया। 20 लाख के बारे में कह दिया कि  यह रकम बैंक में जमा कराई जा चुकी है। अब सवाल यह है कि सिपाहियों ने बैंक में 20 लाख रुपये कैसे जमा करा दिए। इसकी जांच होते ही सिपाहियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि उनके खिलाफ पुलिस अपनी ओर से केस दर्ज कर सकती है। अगर दोनों पर लगे आरोप सही पाए जा सकते हैं तो उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है।
मालूम यह किया जाना है कि क्या उन्होंने रकम किसी और के खातों में जमा की। हालांकि सही स्थिति की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएगी, लेकिन पुलिस में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चा हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो दोनों सिपाहियों की पूरी कुंडली खंगाली जा रही है। एसपी ट्रैफिक को इस बारे में जानकारी दे दी गई है। उनसे ही सिपाहियों के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। इनका करेक्टर रोल चेक किया जाएगा।

पूरी रकम हमारे हवाले करो, वरना हथकड़ी लगा देंगे  
आगरा। नोएडा के कारोबारी ने भले ही केस दर्ज कराने से इंकार कर दिया हो लेकिन इससे पहले उसने पुलिस को पूरा घटनाक्रम बताया। उसका कहना था कि दोनों सिपाहियों ने उसकी गाड़ी रोकी थी। इसके बाद आगे खड़े हो गए। उनकी गाड़ी पर नीली बत्ती लगी थी। उसने सोचा कि बड़े अधिकारी हैं। दोनों बार-बार मोबाइल पर बात कर रहे थे। उससे कहा कि तुम्हारी गाड़ी में कैश है, हमारे पास पक्की सूचना है। उसने पहले रकम देने से मना किया। इस पर एक सिपाही बोला, पूरी रकम हवाले कर दो, वरना हथकड़ी लग जाएगी। पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक सिपाहियों ने व्यापारी को बुरी तरह से धमकाया। उससे उसके कारोबार के बारे में पूछा, कितना टैक्स देते हो, पैसा कहां से आया,  जैसे सवाल किए। 
वर्जन
दोनों सिपाहियों के खिलाफ शिकायत मिली है। उन्होंने फीरोजाबाद में घटना की। इसके आधार पर दोनों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं 
- डा. प्रीतिंदर सिंह ( एसएसपी)

चांदी भी लूट चुकी पुलिस
आगरा। पुलिस पर अब कैश लूट का आरोप लगा है। इससे पहले आगरा के ही एत्माद्दौला थाना की पुलिस पर चांदी लूट का आरोप लगा था। इसमें एक दरोगा और एक सिपाही सस्पेंड किए गए थे। मामला दिवाली का है। आरोप था कि दोनों सेल्स टैक्स का अधिकारी बनकर चांदी कारीगर के घर पहुंचे थे। वहां से 30 किलो चांदी ले आए थे। बाद में अफसरों तक शिकायत पहुंची तो चांदी वापस कर दी।

राज बनकर रह गई सिपाही को लगी गोली
आगरा। ट्रैफिक पुलिस पर पहले भी दाग लगे हैं। यह घटना पिछले साल की है। चार सिपाही कलेक्ट्रेट तिराहा के पास एक दुकान पर बैठे थे। तभी एक ने गोली चलाई। यह सामने बैठे सिपाही को लगी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। चारों सिपाही लाइन हाजिर कर दिए गए थे। गोली तमंचे से चली थी। लेकिन आज तक यह राज नहीं खुला कि गोली किसने और क्यों चलाई थी।

हिरासत में लिए जाने की रही चर्चा
आगरा। शाम तक पुलिस में चर्चा रही कि दोनों सिपाहियों को नोएडा की एसटीएफ ने हिरासत में ले लिया है। व्यापारी के मुकदमा दर्ज कराते ही उनकी गिरफ्तारी की लिखापढ़ी कर दी जाएगी।नोएडा एसटीएफ और आगरा पुलिस का साफ कहना है कि दोनों को हिरासत में नहीं लिया गया है।
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